रिशु श्री का एक और कारनामा, बिहार के नगर विकास विभाग में किया महाघोटाला, एक और बड़े IAS का नाम आया सामने
बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग में रिशु श्री के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश। SULM योजना में टेंडर फिक्सिंग, मैनेजरों के वेतन में कटौती और दो IAS अधिकारियों के निलंबन की पूरी इनसाइड स्टोरी और अब एक प्रधान सचिव लेवल के आईएएस अधिकारी का नाम आय सामने
बिहार के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है, जिसने पूरे सरकारी तंत्र को हिलाकर रख दिया है। 14 दिन कि न्यायिक हिरासत में बुर जेल पहुच चूका मूल रूप से बिहार के सारण जिले का रहने वाला रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा तकनीकी रूप से एक दलाल है जो सूबे में तैनात लगभग 2 दर्ज़न बड़े-बड़े आईएएस (IAS) अधिकारियों का 'फाइनेंशियल गुरु' और सरकारी टेंडर का 'अघोषित सूत्रधार' बताया जा रहा है, जिसने कई विभागों को दीमक की तरह खोखला कर दिया है। रिशु श्री का सबसे बड़ा खेल 'नगर विकास एवं आवास विभाग' में सामने आया है, जहां उसने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन' (NULM) के तहत राज्य में चलने वाले 'स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन' (SULM) में बड़े पैमाने पर धांधली की। इस मिशन का मुख्य काम शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों को स्किल सिखाना, बेघरों के लिए रैन बसेरा बनाना और रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण दिलाना है, जिसमें यह पूरा खेल रचा गया।
टेंडर फिक्सिंग और 'प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट' का खेल
जांच में सामने आया है कि SULM के तहत चलने वाली योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए बनी 'प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट' (PMU) के टेंडर को रिशु श्री अपने हिसाब से मॉडिफाई (बदलाव) करवाता था। वह नियमों में ऐसी शर्तें रखवाता था जिससे उसकी चहेती कंपनियों को आसानी से काम मिल सके। इस टेंडर फिक्सिंग के जरिए न केवल कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था जो पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को नियंत्रित कर रहा था।
वेतन में भारी कटौती और नीचे से ऊपर तक वसूली का नेटवर्क
इस घोटाले का सबसे क्रूर पहलू कर्मचारियों के वेतन में की गई भारी कटौती है। टेंडर पाने वाली कंपनियों को सिटी मिशन मैनेजर (CMM) के लिए सरकार से ₹50,000 मिलते थे, लेकिन वास्तविक रूप से मैनेजरों को केवल ₹40,000 से ₹45,000 ही दिए जाते थे। इसी तरह स्टेट मिशन मैनेजर (SMM) के लिए मिलने वाले ₹75,000 में भी खेल होता था। यह कमीशनखोरी यहीं नहीं रुकी; प्रत्येक अर्बन लोकल बॉडी (ULB) से प्रति व्यक्ति ₹25,000 से ₹30,000 की अवैध वसूली की जाती थी, जिसे सिटी मैनेजरों के जरिए स्टेट मिशन मैनेजर और फिर वहां से ऊपर बैठे सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था।
भर्ती प्रक्रिया में धांधली और भ्रष्टाचार पर अधिकारियों की चुप्पी
इस पूरे सिंडिकेट को सुचारू रूप से चलाने के लिए भर्ती प्रक्रिया में भी जमकर धांधली की गई। स्टेट और सिटी मिशन मैनेजरों की भर्ती के लिए तय अनिवार्य योग्यताओं (Qualifications) को पूरी तरह ताक पर रखकर गलत तरीके से लोगों को बहाल किया गया। चूंकि ये अधिकारी और कर्मचारी गलत तरीके से सिस्टम का हिस्सा बने थे, इसलिए उनके वेतन में की जा रही भारी कटौती और अवैध वसूली के खिलाफ वे कभी कोई आवाज नहीं उठाते थे और भ्रष्टाचार का यह खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहा।
जांच एजेंसियों का बड़ा एक्शन: दो IAS सस्पेंड, तीसरे बड़े नाम का खुलासा
रिशु श्री पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) का शिकंजा कसने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। इस भ्रष्टाचार मामले में संलिप्तता को लेकर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों—योगेश कुमार सागर (IAS) और अभिलाषा कुमारी शर्मा (IAS) को सस्पेंड (निलंबित) किया जा चुका है। वहीं, ईडी की रिपोर्ट में एक और बड़े आईएएस अधिकारी आनंद किशोर का नाम भी सामने आया है, जो लंबे समय तक इस विभाग के प्रधान सचिव रह चुके हैं। आरोप है कि रिशु श्री अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में मनमुताबिक फेवर पाने के लिए सीधे उनके संपर्क में था। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेक्सस को खंगालने में जुटी हैं।