Railway News: वेटिंग टिकट खो गया तो भी मिलेगा पूरा रिफंड! रेलवे का यात्रियों के लिए नया नियम, जानिए कैसे मिलेगा लाभ
Railway News: रेलवे की नई व्यवस्था के तहत, आप बिना फिजिकल टिकट के भी अपना रिफंड क्लेम कर सकते हैं। डिजिटल इंडिया के इस दौर में रेलवे ने रिफंड की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया है कि अब आपका पैसा डूबने का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया है।
Railway News: ट्रेन में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अक्सर देखा जाता है कि वेटिंग टिकट कंफर्म न होने की स्थिति में यात्री रिफंड के लिए परेशान होते हैं, लेकिन सबसे बड़ी मुसीबत तब खड़ी हो जाती है जब वह टिकट ही कहीं खो जाए। अब तक के नियमों के अनुसार, टिकट खो जाने पर रिफंड मिलना लगभग नामुमकिन माना जाता था, लेकिन अब रेलवे ने यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। अब अगर आपका वेटिंग टिकट (Waiting Ticket) कहीं गिर गया है या खो गया है, तो भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। रेलवे की नई व्यवस्था के तहत, आप बिना फिजिकल टिकट के भी अपना रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
उपभोक्ता आयोग पटना ने सुनाया फैसला
दरअसल, विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के मौके पर जिला उपभोक्ता आयोग पटना ने एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि यदि किसी यात्री का वेटिंग लिस्ट टिकट कन्फर्म नहीं होता और वह यात्रा नहीं करता है, तो केवल टिकट खो जाने के आधार पर रिफंड रोकना उचित नहीं है। आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।
टिकट खो गया तो...घबराएं नहीं
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने दिया। मामला पटना के कंकड़बाग निवासी शंभू नाथ से जुड़ा है। उन्होंने दिल्ली से पटना के लिए रेलवे काउंटर से टिकट खरीदा था, जो वेटिंग लिस्ट में था और कन्फर्म नहीं हुआ। यात्री ने यात्रा नहीं की, लेकिन इस दौरान उनका मूल टिकट खो गया।
रिफंड नहीं देने पर किया था शिकायत
जब शंभू नाथ ने रिफंड के लिए रेलवे से संपर्क किया तो भारतीय रेल ने मूल टिकट प्रस्तुत नहीं होने का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.के. दुबे ने आयोग में मामला दायर किया और दलील दी कि यात्री ने टिकट खरीदा था और यात्रा नहीं की, इसलिए उसे रिफंड मिलना चाहिए।
कोर्ट ने दिया आदेश
वहीं रेलवे की ओर से अधिवक्ता आलोक कुमार शरण और कुमार सत्यकृति ने अपना पक्ष रखा। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को 2,398 रुपये टिकट राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (28 मार्च 2014 से) लौटाया जाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का भी निर्देश दिया गया है। आयोग ने कहा है कि यदि 120 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।