बिहार में एनकाउंटर का लाल सियासी तूफान! 22 एनकाउंटर, 6 ढेर, कई घायल,सत्ता और विपक्ष आमने-सामने, जाति और कानून व्यवस्था पर गरम बहस

Bihar Encounter Politics: बिहार की धरती पर इन दिनों अपराध और पुलिसिया कार्रवाई का ऐसा उबाल देखने को मिल रहा है जिसने सियासत से लेकर सड़कों तक हलचल मचा दी है।...

बिहार में एनकाउंटर का लाल सियासी तूफान! 22 एनकाउंटर, 6 ढेर,
22 एनकाउंटर, 6 ढेर, कई घायल,सत्ता और विपक्ष आमने-सामने- फोटो : X

Bihar Encounter Politics: बिहार की धरती पर इन दिनों अपराध और पुलिसिया कार्रवाई का ऐसा उबाल देखने को मिल रहा है जिसने सियासत से लेकर सड़कों तक हलचल मचा दी है। एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सख्त संदेश गूंज रहा है बच्चियों के साथ घिनौना अपराध करने वालों को माला नहीं, बल्कि सजा की माला पहनाई जाएगी। क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि एनकाउंटर जाति देखकर हो रहे हैं, यह कानून नहीं बल्कि माहौल बनाने की राजनीति है।

इसी सियासी टकराव के बीच बिहार पुलिस की एनकाउंटर नीति पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गई है। 20 नवंबर 2025 के बाद से अब तक 22 एनकाउंटर दर्ज किए गए हैं, जिनमें 6 अपराधियों की मौत और कई के घायल होने की पुष्टि हुई है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इनमें विभिन्न जातीय पृष्ठभूमि के अपराधी शामिल रहे—2 यादव, 2 सवर्ण, 1 कुशवाहा, 1 ब्राह्मण, 1 भूमिहार और 1 माली समेत अन्य कई घायल हुए।

29 अप्रैल को भागलपुर में रामधनी यादव को 11 घंटे के भीतर एनकाउंटर में ढेर किया गया, जो नगर परिषद अधिकारी की हत्या का मुख्य आरोपी था। 3 मई को सीवान में सोनू यादव मुठभेड़ में मारा गया, जिसने दिनदहाड़े हत्या कर सनसनी फैलाई थी। 31 दिसंबर को बेगूसराय में नक्सली दयानंद मालाकार मुठभेड़ में ढेर हुआ।

इसी तरह 6 फरवरी को वैशाली में सोना लुटेरा प्रिंस उर्फ अभिजीत एनकाउंटर में मारा गया, जिस पर देशभर में 300 किलो सोना लूट सहित 30 केस दर्ज थे। 17 मार्च को पूर्वी चंपारण में STF जवान की शहादत के बाद दो कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर (भूमिहार) और प्रियांशु दुबे (ब्राह्मण) मारे गए।

वहीं हाफ एनकाउंटर की लंबी फेहरिस्त भी सामने आई है जहां कई अपराधियों को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया। इनमें यादव, राजपूत, कुशवाहा, भूमिहार और अन्य वर्गों के अपराधी शामिल रहे। पटना, सीवान, छपरा, बाढ़ और वैशाली जैसे जिलों में लगातार मुठभेड़ों ने पूरे राज्य में गोली बनाम गोली की नीति को चर्चा में ला दिया है।

18 मई को सीवान में अंकित कुमार सिंह के हाफ एनकाउंटर ने भी सुर्खियां बटोरीं, जबकि 19 मई को पटना में 27 लाख की लूट के आरोपी नीतीश कुमार को पुलिस ने दौड़ाकर गोली मारी।सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई मामलों में अपराधी फायरिंग कर पुलिस को चुनौती देते दिखे, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उन्हें घायल या गिरफ्तार किया गया।

हालांकि इस पूरी कार्रवाई पर सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष इसे चयनित कार्रवाई बता रहा है, जबकि सरकार इसे कानून का सख्त राज करार दे रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्पष्ट संदेश है कि अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कोई समझौता नहीं होगा।इधर पुलिस प्रशासन का दावा है कि हर एनकाउंटर आत्मरक्षा और कानून के दायरे में हुआ है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग तेज कर दी है।बिहार इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां क्राइम, करप्शन और सियासत एक-दूसरे से टकरा रहे हैं और बीच में जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या गोली की भाषा ही अब कानून की असली जुबान बन चुकी है?