अवैध खनन को लेकर वाहन मालिकों और पुलिस के बीच चूहा - बिल्ली का खेल खत्म करे सरकार, पटना हाईकोर्ट ने दिया यह बड़ा आदेश

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए बड़ा आदेश दिया है। अब खनन अधिकारियों को वाहनों की जब्ती की पूरी वीडियोग्राफी करनी होगी। जानें जस्टिस राजीव रॉय का पूरा फैसला।

अवैध खनन को लेकर वाहन मालिकों और पुलिस के बीच चूहा - बिल्ली

Patna - बिहार में खनन विभाग और वाहन मालिकों के बीच चलने वाले "लुका-छिपी" के खेल पर अब पटना हाईकोर्ट ने पूर्णविराम लगा दिया है। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के खान एवं खनिज विभाग को निर्देश दिया है कि वह अपने जमीनी अधिकारियों को जब्ती प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे।

प्रौद्योगिकी के दौर में पश्चिमी देशों जैसी पारदर्शिता की अपेक्षा

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस राजीव रॉय ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में, जब तकनीक हर हाथ में उपलब्ध है, तो अधिकारियों से यह न्यूनतम अपेक्षा की जाती है कि वे वाहन रोकने से लेकर उसे जब्त करने तक की पूरी प्रक्रिया का वीडियो साक्ष्य तैयार करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी कार्यप्रणाली पश्चिमी देशों में अपनाई जाती है और अब बिहार में भी इसे लागू करना अनिवार्य है।

मनोज कुमार मेहता बनाम खनन विभाग: क्या था पूरा विवाद?

यह पूरा मामला मनोज कुमार मेहता के एक ट्रक की जब्ती से शुरू हुआ।

  • याचिकाकर्ता का पक्ष: अधिवक्ता शंभू नारायण सिंह ने दलील दी कि उनका ट्रक 11 जनवरी 2026 को नवादा में जब्त किया गया था। उनके पास रात 8:45 बजे जारी किया गया एक वैध चालान था, जो 13 जनवरी तक प्रभावी था।

  • विभाग का तर्क: वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने दावा किया कि ट्रक को रात 10 बजे बिना किसी दस्तावेज के रोका गया था और कोर्ट में पेश किया गया चालान जब्ती के बाद फर्जी तरीके से बनवाया गया था।


  • वीडियोग्राफी क्यों जरूरी? कोर्ट ने बताए ये फायदे

अदालत ने गौर किया कि उसके पास अक्सर ऐसे मामले आते हैं जहाँ मालिक वैध चालान का दावा करता है और अधिकारी दस्तावेजों के अभाव की बात करते हैं। वीडियोग्राफी अनिवार्य होने से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  • सफलता दर में सुधार: यदि विभाग वीडियो फुटेज के माध्यम से साबित कर देगा कि जब्ती कानूनन सही है, तो कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूत होगा।

  • आरोपों से मुक्ति: अक्सर अधिकारियों पर 'मांग पूरी न होने' पर जबरन जब्ती के आरोप लगते हैं, वीडियो साक्ष्य उन्हें इन आरोपों से बचाएगा।

  • न्यायिक स्पष्टता: किसी भी पक्ष को दस्तावेजों की मांग या जब्ती के समय को लेकर झूठ बोलने या बचाव का रास्ता नहीं मिलेगा।


  • हाईकोर्ट का कड़ा निर्देश: पेन ड्राइव में देनी होगी रिपोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जब्ती के समय बनाई गई वीडियो फुटेज वाली पेन ड्राइव को जब्ती के आधिकारिक दस्तावेजों के साथ संलग्न करना होगा। इसके अलावा, औपचारिक जब्ती आदेश (Seizure Order) में इस वीडियो साक्ष्य का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।

अदालत ने नवादा के जिला खनन अधिकारी को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के मामले का दो सप्ताह के भीतर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचकर निपटारा करें।