Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को दिया झटका, दो डॉक्टरों की बर्खास्तगी को किया रद्द, तुरंत बहाली के दिए आदेश

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने बिहार स्वास्थ्य विभाग को बड़ा झटका देते हुए दो सरकारी चिकित्सा अधिकारियों (मेडिकल ऑफिसर्स) के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है.........पढ़िए आगे

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को दिया झटका,
बिहार सरकार को झटका - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाइकोर्ट ने बिहार स्वास्थ्य विभाग को करारा झटका देते हुए दो सरकारी चिकित्सा अधिकारियों (मेडिकल ऑफिसर्स) के सेवा से बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों से पूछताछ किए बिना और केवल कागजी पत्राचार के आधार पर एकतरफा कार्रवाई करना कानून की नजर में बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है। डॉ. ठाकुर अशोक कुमार प्रसाद  और डॉ. मो. इशरत हुसैन की रिट याचिकाओं पर सभी सम्बन्धित पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस कुमार मनीष की एकल पीठ ने निर्णय सुनाया। 

कोर्ट ने कहा कि बिहार सेवा संहिता के नियम 76 के तहत बिना उचित विभागीय जांच के लंबे समय से अनधिकृत अनुपस्थिति के नाम पर बर्खास्तगी अवैध  हैं। हाईकोर्ट ने विभाग के दोनों बर्खास्तगी ज्ञापनों (मेमो नंबर 166(9) दिनांक 09.02.2017 और मेमो नंबर1145(9) दिनांक 31.10.2016) को पूरी तरह से रद्द करते हुए दोनों डॉक्टरों की तत्काल बहाली का आदेश दिया।हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की। इन गंभीर गलतियों को पकड़ा।

कोर्ट ने पाया कि विभाग ने आरोपों को साबित करने के लिए किसी भी मौखिक गवाह का परीक्षण नहीं कराया, जो कि बिहार सी.सी.ए. नियमावली रुल के नियम 17(14) का सीधा उल्लंघन है। बिना तामील के एकतरफा कार्रवाई की गयी। डाक विभाग की रिपोर्ट से स्पष्ट था कि कारण बताओ नोटिस डॉक्टरों को मिले ही नहीं थे। डाक टिप्पणी थी कि सीवान में रहते हैं। इसके बावजूद विभाग ने बिना समन दिए एकतरफा जांच रिपोर्ट बना दी। डॉक्टरों को सजा देने से पहले विभागीय जांच की रिपोर्ट तक नहीं सौंपी गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। बीपीएससी की सलाह को भी नजरअंदाज  किया गया। डॉ. प्रसाद के मामले में बिहार लोक सेवा आयोग ने बर्खास्तगी की सजा पर असहमति जताई थी, लेकिन विभाग ने मनमाने ढंग से उसे रद्द कर दिया।  

कोर्ट के मुख्य निर्देश देते हुए  इनकी सेवा में बहाली का आदेश  दिया। दोनों डॉक्टरों को उनके पद पर 3 महीने के भीतर पुनः बहाल किया जाए।बर्खास्तगी के दौरान के वेतन और सेवा अवधि के निर्धारण का निर्णय सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार लेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट  किया कि यदि राज्य सरकार चाहे, तो नियमों का सख्ती से पालन करते हुए और डॉक्टरों को सुनवाई का पूरा अवसर देकर नए सिरे से कार्रवाई शुरू कर सकती है।