गोपालगंज में भू-माफियाओं की शामत: पटना हाईकोर्ट के एक फैसले ने प्रशासन में मचाया हड़कंप, 90 दिनों का मिला अल्टीमेटम!
पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज में सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जे को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं।
Patna - पटना हाईकोर्ट ने बिहार के गोपालगंज जिले में वन विभाग की करीब तीन एकड़ सरकारी भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को बेहद गंभीरता से लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ 'गुड्डू बाबा' द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तीन महीने के भीतर कार्रवाई का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने गोपालगंज के जिलाधिकारी (DM), प्रमंडलीय वन पदाधिकारी और जिला वन पदाधिकारी को आदेश दिया है कि वे अगले तीन माह के भीतर चिन्हित 3 एकड़ वन भूमि से हर हाल में अतिक्रमण हटा लें।
RTI के जरिए हुआ था बड़ा खुलासा
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याचिकाकर्ता गुड्डू बाबा ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस अतिक्रमण की पुख्ता जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत मिली थी। 2024 में प्राप्त सूचना से यह स्पष्ट हुआ था कि गोपालगंज में वन विभाग की बहुमूल्य भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक हित में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सरकार और विभाग की कार्यशैली पर सवाल
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार और वन विभाग की शिथिलता के कारण ही अब तक यह जमीन अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी है। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि सिर्फ गोपालगंज ही नहीं, बल्कि राज्य के कई अन्य जिलों में भी वन विभाग की हजारों एकड़ जमीन भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के चंगुल में फंसी हुई है।
जनहित याचिका का निष्पादन
कोर्ट ने प्रशासन को तीन महीने का अल्टीमेटम देने के साथ ही इस जनहित याचिका को निष्पादित (Dispose) कर दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब जिला प्रशासन और वन विभाग पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से बिहार में अन्य जगहों पर भी अतिक्रमित सरकारी जमीनों को मुक्त कराने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।