भारतीय संस्कृति का शंखनाद: नियोजन भवन में विक्रम संवत 2083 का स्वागत, चंदन-वंदन से महका CAT परिसर
पटना के नियोजन भवन में सीनियर सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल टी एन ठाकुर के नेतृत्व में भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत 2083 का भव्य स्वागत किया गया।
Patna - राजधानी पटना के नियोजन भवन स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में आज भारतीय नववर्ष और विक्रम संवत 2083 के आरंभ पर एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीनियर सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल (CAT) के टी एन ठाकुर ने की। इस अवसर पर पूरा परिसर भारतीय परंपरा के रंग में रंगा नजर आया और विधि जगत से जुड़े लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को गौरव के साथ याद किया।
चंदन-वंदन और पत्रक वितरण से हुआ स्वागत
समारोह की शुरुआत अत्यंत पारंपरिक तरीके से की गई। टी एन ठाकुर ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी अतिथियों और सदस्यों का चंदन-वंदन कर अभिनंदन किया। इसके साथ ही, भारतीय नववर्ष के वैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने वाला एक विशेष शुभकामना पत्रक भी सभी को प्रदान किया गया। इस पत्रक के माध्यम से नई पीढ़ी और सहयोगियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया गया।
समरसता और भाईचारे का अनूठा संदेश
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में समरसता और आपसी प्रेम को बढ़ावा देना था। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को चंदन का तिलक लगाकर नववर्ष की बधाई दी और संकल्प लिया कि वे पेशेवर जीवन के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी मजबूत करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि विक्रम संवत न केवल काल गणना का आधार है, बल्कि यह हमारी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक भी है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं और प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में कानून और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इनमें श्री जी के अग्रवाल, रविंद्र राय, राकेश ठाकुर, प्रियंका, राजलछमी, कौशल कुमार झा, रामानुज तिवारी और रविंद्र कुमार प्रमुख थे। सभी ने भारतीय नववर्ष के इस सांस्कृतिक महत्व वाले आयोजन की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
शुभकामनाओं का दौर और आध्यात्मिक माहौल
समारोह में चौबेजी, संजीव कुमार मिश्रा (गीतावाले बाबा), डॉक्टर अंजनी कुमार सिंह, अरविंद कुमार और मंटू ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सभी को नववर्ष की मंगलकामनाएं दीं। गीतावाले बाबा के संबोधन ने माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के प्रति सेवा और अपनी संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।