Bihar road construction:अब खेत नहीं,सड़क निर्माण से चमकेगी किस्मत!अब नदियों-तालाबों का गाद से बनेगा सड़क, खेतों की हिफाजत और जल संरक्षण की नई इबारत लिखेगी सरकार!
Bihar road construction:अब नदियों, नहरों, तालाबों और पोखरों से निकाले गए डी-सिल्टेड गाद (सिल्ट) का उपयोग सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाएगा।
Bihar road construction: पटना से आई इस सनसनीखेज खबर ने सियासी और विकास जगत में हलचल मचा दी है। पथ निर्माण विभाग ने एक ऐसा दूरगामी और क्रांतिकारी फैसला लिया है, जिसे विशेषज्ञ इको-डेवलपमेंट का नया मॉडल बता रहे हैं। अब नदियों, नहरों, तालाबों और पोखरों से निकाले गए डी-सिल्टेड गाद (सिल्ट) का उपयोग सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाएगा।
विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी तल और नहर चैनलों से निकली इस सामग्री के प्रभावी उपयोग के लिए जिला स्तर पर समन्वय समिति बनाई जाए। साथ ही जल संसाधन विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेकर परियोजनाओं को तेज रफ्तार दी जाए।
यह पहल केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि यह निर्माण की स्वीकृति यानी समग्र विकास की नई सोच है। पटना में दीघा से सभ्यता द्वार, भद्र घाट से दीदारगंज तक, नालंदा में सलेपुर-राजगीर ग्रीनफील्ड बौद्ध सर्किट, बक्सर का चौसा-बक्सर बाईपास और दरभंगा का भारतमाला कॉरिडोर सभी परियोजनाओं में इस तकनीक का इस्तेमाल होगा।
सरकार का दावा है कि इससे निर्माण कार्यों में रफ्तार आएगी और लागत में भी संतुलन बना रहेगा। सबसे अहम बात यह है कि कृषि योग्य उपजाऊ मिट्टी की कटाई पर रोक लगेगी, जिससे किसानों के खेत सुरक्षित रहेंगे। वहीं दूसरी ओर, जलाशयों की गहराई बढ़ेगी, उनकी धारण क्षमता मजबूत होगी और भूजल पुनर्भरण (ग्राउंड वाटर रिचार्ज) को भी नई ताकत मिलेगी।
पहले फ्लाई ऐश जैसे विकल्पों पर निर्भरता थी, लेकिन उसकी सीमित उपलब्धता ने नई चुनौती पैदा कर दी थी। अब यह सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल विकास और पर्यावरण दोनों के बीच एक मजबूत पुल बनता दिख रहा है।
कुल मिलाकर, यह कदम सिर्फ सड़क नहीं बना रहा, बल्कि सियासत, समाज और सरोकार तीनों को जोड़ते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा हैजहां मिट्टी भी बोलेगी और पानी भी गवाही देगा!