नीतीश को चांदी के सिक्कों से तौला, फिर अनंत के गांव में गईं 9 जानें! 2004 के खूनी घटनाक्रम की पूरी कहानी

, 2 अगस्त 2004 की सुबह पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित लदमा गांव में पुलिस और विशेष कार्य बल (STF) ने संयुक्त अभियान चलाया। तब अनंत सिंह जेल में थे। इस कार्रवाई में अनंत सिंह गिरोह के आठ सदस्य मारे गए, वहीं एक STF जवान शहीद हो गया।

Nitish Kumar Anant Singh
Nitish Kumar Anant Singh- फोटो : news4nation

Anant Singh :  साल 2004... बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में थे। इस बार बाढ़ लोकसभा सीट पर उनकी राह आसान नहीं थी। इसी दौर में मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह से उनकी नजदीकी बढ़ी। अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौलकर राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन इसी साल कुछ महीने बाद अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा में ऐसा खूनी घटनाक्रम हुआ, जिसमें आठ लोगों की मौत पुलिस मुठभेड़ में हुई, जबकि घायल एसटीएफ जवान ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। कुल नौ जानें गईं।


करीब 22 साल बाद अनंत सिंह के एक बयान ने उस पुराने घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ रहने के दौर का जिक्र करते हुए नौ लोगों की 'कुर्बानी' करवाने की बात कही। उनके बयान के बाद 2 अगस्त 2004 की वह मुठभेड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। 


जब अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौला

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ और नालंदा, दोनों संसदीय क्षेत्रों से चुनाव मैदान में उतरे थे। वह इससे पहले 1989, 1991, 1996, 1998 और 1999 में बाढ़ से सांसद रह चुके थे। उस समय बाढ़ में उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर चुनौतियों की चर्चा थी। बाढ़ और मोकामा के इलाके में अनंत सिंह के परिवार का प्रभाव था। उनके भाई दिलीप सिंह 1990 और 1995 में मोकामा से विधायक चुने गए थे। दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बाहुबली सूरजभान सिंह का भी प्रभाव था। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में सूरजभान ने दिलीप सिंह को हराया था। हालांकि इस दौरान नीतीश कुमार ने पहली बार बिहार के सीएम पद की शपथ ली और उस दौर में जेल में बंद सूरजभान सिंह सहित अन्य बाहुबली विधायकों का समर्थन मांगने वे गए थे। लेकिन नीतीश को 7 दिन बाद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।


इस बीच बिहार की सियासत में कई बड़े बदलाव हुए। नीतीश के करीबी कहे जाने वाले सूरजभान की रामविलास पासवान से नजदीकी बढ़ गई। रामविलास और लालू एक साथ बिहार में लोकसभा चुनाव 2004 में उतरे तो सूरजभान को बलिया संसदीय क्षेत्र से लोजपा उम्मीदवार बनाया गया। बाढ़ संसदीय सीट पर पहले से चुनौती झेल रहे नीतीश के लिए सूरजभान का विरोधी खेमे से मिल जाना बड़ा झटका था।

बताया जाता है कि इसी कारण 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और अनंत सिंह की नजदीकी बढ़ी। इसी दौर में अनंत सिंह ने एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तौला था। इस घटना को दोनों नेताओं के संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा गया। हालांकि, चुनावी नतीजा नीतीश कुमार के पक्ष में नहीं रहा। बाढ़ सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विजय कृष्ण ने उन्हें 37,688 वोटों से हरा दिया, जबकि नालंदा सीट से नीतीश कुमार चुनाव जीत गए। तब बिहार में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं। कहते हैं लालू-राबड़ी को नीतीश और अनंत की बढ़ती नजदीकी अच्छी नहीं लगी थी। ऐसे में अनंत सिंह पर कार्रवाई की तैयारी की गई। 

दो अगस्त 2004 की सुबह लदमा में पहुंची STF

लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद, 2 अगस्त 2004 की सुबह पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित लदमा गांव में पुलिस और विशेष कार्य बल (STF) ने संयुक्त अभियान चलाया। तब अनंत सिंह जेल में थे। समकालीन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि अनंत सिंह गिरोह के सदस्य किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर STF और पटना पुलिस की टीम गांव पहुंची।

पुलिस टीम ने संदिग्ध अपराधियों को चुनौती दी तो उनकी ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। मुठभेड़ कई घंटे तक चली। 3 अगस्त 2004 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में अनंत सिंह गिरोह के आठ सदस्य मारे गए। गोली लगने से घायल STF जवान रघुवंश प्रताप सिंह ने पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) ले जाते समय दम तोड़ दिया। इस तरह मुठभेड़ में कुल नौ लोगों की मौत हुई थी।


 मुठभेड़ में मारे गए अनंत सिंह समर्थित आठ लोगों की पहचान भीम सिंह, डेनी, चिंटू कुमार, गणेश कुमार, बाल्मीकि सिंह, सुनील कुमार, रजनीश और सुरेंद्र कहार उर्फ बिठ्ठल के रूप में हुई। ये सभी पुलिस के अनुसार अनंत सिंह से जुड़े थे। पुलिस ने दावा किया था कि वे हत्या, अपहरण, लूट और रंगदारी समेत कई आपराधिक मामलों में वांछित थे। वहीं मुठभेड़ में जान गंवाने वाले STF जवान रघुवंश प्रताप सिंह वैशाली जिले के खड़िका गांव के रहने वाले थे। उनकी मौत ने पुलिस महकमे में भी शोक की स्थिति पैदा कर दी थी।


हथियार बरामद, पांच लोगों की गिरफ्तारी  

मुठभेड़ के बाद लदमा गांव में तलाशी और छापेमारी का अभियान चलाया गया। समकालीन रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने चार सेमी-ऑटोमेटिक राइफल, दो डबल बैरल बंदूकें, दो देसी पिस्तौल, 70 खोखे और 25 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। कार्रवाई के दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर आई थी। पुलिस का कहना था कि गिरोह के सदस्य किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। उस समय अनंत सिंह हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। 


अनंत सिंह के मकान में मिली थी गुप्त सुरंग 

लदमा में अनंत सिंह के ठिकाने की तलाशी के दौरान एक गुप्त सुरंग मिलने की बात सामने आई थी, जिसके बारे में बताया गया कि वह आगे जाकर तालाब में खुलती थी। तत्कालीन STF अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित खबरों में कहा गया था कि इस मकान और सुरंग का इस्तेमाल हथियार छिपाने के लिए किया जाता था। 

22 साल बाद फिर क्यों चर्चा में आई लदमा मुठभेड़?

अनंत सिंह के हालिया बयान ने 2004 की इस घटना को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ रहने के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने नौ लोगों की हत्या करवाई थी। इस बयान को लदमा मुठभेड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।  लदमा की उस मुठभेड़ में आठ कथित अपराधियों और एक STF जवान की जान गई थी। अब इतने वर्षों बाद इस घटना का फिर चर्चा में आना बिहार की राजनीति में उस दौर के बाहुबल, सत्ता के समीकरणों और नेताओं के आपसी संबंधों की याद दिलाता है।

रविशंकर की रिपोर्ट