Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नया दांव,नई सरकार का ये होगा फार्मूला, बिहार में बिछ गई नई सत्ता की बिसात

Bihar Politics: पटना के सत्ता गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन का फार्मूला लगभग तैयार हो चुका है। ...

Nitish Kumar New Gambit Bihar Next Govt Formula Revealed
बिहार में नई सरकार का फार्मूला!- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों हलचल तेज हो गई है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब प्रदेश की राजनीति से हटकर केंद्र की सियासत में सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के महज़ तीन महीने बाद यह फैसला बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो 10 से 14 मार्च के बीच मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद उनका रास्ता राज्यसभा की ओर खुल सकता है।

राजधानी पटना के सत्ता गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन का फार्मूला लगभग तैयार हो चुका है। भाजपा और जदयू के बीच नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। प्रस्तावित कैबिनेट के फॉर्मूले के अनुसार कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसमें भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा (रा) के 2, जबकि  हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल हो सकते हैं।

इसी बीच एक और सियासी खबर ने माहौल को और गरमा दिया है। मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि 8 मार्च को वे औपचारिक रूप से जदयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस खबर के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पटना स्थित जदयू कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है विकसित बिहार के नए अध्याय की शुरुआत, निशांत कुमार।

दूसरी तरफ आम जनता, खासकर महिलाओं के बीच भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई महिलाओं ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की छवि को बदला और गाली से एक बिहारी सब पर भारी वाली पहचान दिलाई। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने बिहार को अपने घर की तरह सजाया और संवारा है।

हालांकि कुछ मतदाताओं की नाराज़गी भी सामने आई है। उनका कहना है कि अगर पहले से पता होता कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं, तो शायद वे चुनाव में उनके नाम पर वोट नहीं देते। कुल मिलाकर बिहार की सियासत में अब नया अध्याय शुरू होने वाला है, जहां पटना की राजनीति से दिल्ली की सत्ता तक एक नई चाल चली जा रही है।