शहीद जुब्बा सहनी के पैतृक गांव में अब तक नहीं पहुंची विकास की किरण, मुकेश सहनी ने NDA सरकार को घेरा

मुकेश सहनी ने अमर शहीद जुब्बा सहनी के शहादत दिवस पर एनडीए सरकार को आड़े हाथों लिया। सहनी ने आरोप लगाया कि शहीद के नाम पर राजनीति तो खूब हुई, लेकिन उनके पैतृक गांव चैनपुर में आज भी सड़क तक नहीं है और न ही उसे राजस्व गांव का दर्जा मिला है।

शहीद जुब्बा सहनी के पैतृक गांव में अब तक नहीं पहुंची विकास क

Patna - : विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने आज अमर शहीद जुब्बा सहनी के शहादत दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सहनी ने शहीद के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका साहस और संघर्ष आज भी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हालांकि, इस मौके पर उन्होंने बिहार की वर्तमान एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा और विकास के दावों की पोल खोली। 

शहीद के गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से चर्चित मुकेश सहनी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस महापुरुष ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उनके पैतृक गांव तक आज भी विकास की किरण नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने मुजफ्फरपुर जिले के चैनपुर गांव की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि शहीद जुब्बा सहनी के स्मारक तक पहुंचने के लिए एक अदद सड़क तक नसीब नहीं है। लोग आज भी कच्ची राहों के सहारे वहां तक पहुंचने को मजबूर हैं। 

राजस्व गांव के दर्जे का वर्षों से इंतजार

मुकेश सहनी ने एनडीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जो नेता 21 साल से सत्ता में रहने का दम्भ भरते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि आखिर चैनपुर को अब तक 'राजस्व गांव' का दर्जा क्यों नहीं मिला? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक गांव आज भी अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। सहनी ने कहा कि विकास की बातें केवल कागजों और भाषणों तक सीमित हैं, धरातल पर सच्चाई इसके उलट है। 

तंगहाली में जी रहा है शहीद का परिवार

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सहनी ने सरकार का ध्यान शहीद के परिजनों की ओर भी आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि शहीद जुब्बा सहनी के परिवार के सदस्य आज भी बेहद साधारण और कठिन परिस्थितियों में अपना जीवनयापन कर रहे हैं। सरकार की नजरें उन तक नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के प्रति सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या उन्हें केवल चुनावों के समय ही याद किया जाएगा? 

झूठी घोषणाओं और राजनीति का लगाया आरोप

अंत में वीआईपी प्रमुख ने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस गांव में विकास की घोषणाएं नहीं की गईं। समय-समय पर बड़े नेताओं ने वहां जाकर घोषणाओं की झड़ी लगाई, लेकिन उन वादों को कभी जमीन पर नहीं उतारा गया। सहनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि शहीद के नाम पर राजनीति तो बहुत हुई, लेकिन अब समय आ गया है कि उनके गांव और परिवार को उनका हक दिया जाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि अविलंब चैनपुर को राजस्व गांव घोषित कर वहां सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं।