Bihar News : ‘अपराधियों की भी करा लें जातिगत जनगणना’, तेजस्वी यादव पर मंत्री संतोष सुमन ने कसा तंज, श्याम सुंदर शरण ने याद दिलाया 2004 का 'जंगलराज'
Bihar News : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि “अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, उनका सिर्फ एक परिचय होता है — अपराधी......पढ़िए आगे
PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि “अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, उनका सिर्फ एक परिचय होता है — अपराधी। लेकिन अगर तेजस्वी यादव चाहें तो हम मुख्यमंत्री से आग्रह कर देंगे कि अपराधियों की भी जातिगत जनगणना करा दी जाए, ताकि एनकाउंटर से पहले पुलिस थाने में उनका ‘जाति प्रमाण पत्र’ भी जांच लिया जाए। उन्होंने कहा की अपराध पर राजनीति और अपराधियों पर जातीय चादर डालना बिहार के लिए बेहद खतरनाक है। क्या अब पुलिस अपराधियों से पहले उनकी जाति पूछेगी? कहा की जिनके शासनकाल में बिहार जंगलराज, अपहरण और भय के लिए बदनाम था, वे आज कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।एनडीए सरकार में कानून का राज है। जो अपराध करेगा, कार्रवाई तय है — बिना भेदभाव, बिना दबाव।”
वहीँ हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने कहा की मुझे आज भी याद है…साल 2004, माघ का महीना। सुबह करीब 10 बजे हम मोटरसाइकिल से पटना जा रहे थे। दनियावाँ के पास एक लंबा सिंगल पुल पड़ता था, जहां अक्सर जाम लगता था। हम आधा पुल पार कर चुके थे कि अचानक सामने से हूटर बजाता हुआ एक काफिला आया और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस वाले दौड़-दौड़कर गाड़ियां पीछे कराने लगे। जो जहां था वहीं रुक गया। जिसने थोड़ा भी देर किया, उसके ऊपर लाठी-डंडे चलने लगे। कई लोगों की बाइक गिर गई, दर्जनों आम लोग पिटे। किसी तरह हम भी गाड़ी घुमाकर पीछे आए। फिर पूरा पुल खाली कराया गया और जिस काफिले को निकाला गया उसमें थे — राबड़ी देवी जी के भाई, लालू प्रसाद यादव के साले सुभाष यादव। यही था उस दौर का “जलवा”… यही था जंगलराज का डर। और आज?
आज अगर दलित समाज की एक महिला, तीन-तीन बार की विधायक, अपने ही क्षेत्र में गुजर रही हैं तो उनकी गाड़ी रोकी जाती है। पीछे करने का दबाव बनाया जाता है। गार्ड उतरता है तो उसके साथ मारपीट होती है। विधायक के साथ धक्का-मुक्की की कोशिश होती है। भद्दी-भद्दी जातिसूचक गालियां दी जाती हैं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि ज्योति मांझी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की विधायक हैं। क्योंकि वे उस समाज की प्रतिनिधि हैं जिसे सदियों तक सबसे नीचे दबाकर रखा गया। कहा की लालू यादव की राजनीति का सबसे खतरनाक “मेमोरी कार्ड” आज भी उनके लोगों के दिमाग में फिट है —कि दलित, अति पिछड़ा, गरीब, अल्पसंख्यक… कोई भी उनके बराबर कैसे चल सकता है? कैसे फोर व्हीलर में गार्ड के साथ निकल सकता है? जो लोग संविधान की दुहाई देते हैं, सामाजिक न्याय की बात करते हैं, वही आज दलित नेताओं को रास्ता देने तक को तैयार नहीं हैं। और यही वो लोग हैं जो दलितों पर सबसे अधिक अत्याचार करते हैं ,बिहार के थानों में दर्ज sc/st act के सबसे ज्यादा मामले लालू जी के ही समर्थकों पर दर्ज हैं जो कहते थे कि “घोड़ी पर नहीं बैठने देते”, “आगे नहीं बढ़ने देते”, वही हमेशा से दलितों के शोषक रहे हैं
शरण ने कहा की याद रखिए…अब वह दौर नहीं रहा। यह जीतन राम मांझी का दौर है। अब दलितों का नरसंहार नहीं किया जा सकता है। अब दलितों को रौंदने की हर मानसिकता को कानून के बुलडोजर से रौंद दिया जाता है। यह संविधान से ताकत पाए हुए समाज का दौर है। यह सम्राट चौधरी की सरकार है। टकराओगे तो कानून चलेगा। अराजकता करोगे तो बुलडोजर चलेगा। लाठी चलाओगे तो लाठी चलेगा और गोली चलाओगे तो गोली भी मारा जाएगा। और जो दिमाग में सामंतवाद का फितूर बचा है, उसे भी जमींदोज कर दिया जाएगा। सत्ता से पच्चीस साल की दुरी के बाद भी इतना अराजक ,इतना अत्याचार की मानसिकता ?