Bihar News : मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने राहुल गांधी पर किया हमला, कहा– 'भाषणों से नहीं, नेतृत्व और आचरण से सिद्ध होता है महिला सशक्तिकरण'
Bihar News : मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने कहा कि यदि राहुल गांधी पुरुष वर्चस्व के खिलाफ इतने ही गंभीर हैं, तो वे अपनी पार्टी की कमान प्रियंका गांधी को सौंपकर मिसाल पेश करें.........पढ़िए आगे
PATNA : हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं के महिला सम्मान, बराबरी और सामाजिक न्याय संबंधी बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के आचरण और नेतृत्व में दिखाई देना चाहिए।
डॉ. सुमन ने कहा कि यदि राहुल गांधी महिलाओं के सम्मान, बराबरी और पुरुष वर्चस्व के खिलाफ इतने गंभीर हैं, तो इसकी शुरुआत अपनी पार्टी से करें और कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को सौंपकर उदाहरण प्रस्तुत करें। इसी तरह तेजस्वी यादव सामाजिक न्याय और बराबरी की बात करते हैं तो क्या वे राजद की कमान मीसा भारती को सौंपने का साहस दिखाएंगे? उन्होंने कहा कि स्टालिन और अखिलेश यादव सहित जो नेता महिलाओं को बराबरी देने की बात करते हैं, उन्हें अपने संगठन और सत्ता में महिलाओं को वास्तविक नेतृत्व का अवसर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुस्मृति के खिलाफ बोलने से पहले राजनीतिक दलों को अपने राजनीतिक आचरण और इतिहास को भी देखना चाहिए। जब देश ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाने का निर्णय लिया, तब उनके खिलाफ खड़े होने वालों को पहले अपने राजनीतिक रुख पर देश को जवाब देना चाहिए। महिला सशक्तीकरण की बात करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस ने कितने राज्यों में महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व दिया, कितनी महिला प्रदेश अध्यक्ष बनीं और आज कितने राज्यों में कांग्रेस की महिला मुख्यमंत्री हैं।
डॉ. सुमन ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पंचायत चुनाव से लेकर शिक्षक बहाली तक महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का मॉडल स्थापित किया गया। वहीं जीतन राम मांझी के नेतृत्व में बिहार की बेटियों को उच्च शिक्षा तक निःशुल्क पहुंच देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि यह महिला सशक्तीकरण का वास्तविक उदाहरण है, जो जमीन पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आज जेन-Z और जेन-अल्फा का दौर है। नई पीढ़ी नेताओं के भाषणों के साथ उनके राजनीतिक इतिहास और आचरण को भी देखती और परखती है। देश को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की नहीं, बल्कि विकास, एकजुटता, सद्भाव और मिल्लत की राजनीति की जरूरत है।डॉ. सुमन ने कहा कि महिला सम्मान की शुरुआत अपने घर और अपनी पार्टी से कीजिए। महिलाओं को उपदेश नहीं, अवसर और नेतृत्व दीजिए। तभी बराबरी और महिला सशक्तीकरण की बात विश्वसनीय और सार्थक होगी।