Bihar News: बिहार में आंगनबाड़ी के मासूमों का भविष्य संवार रहीं जीविका की दीदियां, लिख रहीं हुनर से नई इबारत, ऐसे हो रही है कमाई

Bihar News: बिहार में आंगनबाड़ी के मासूमों का भविष्य संवार र
बच्चों का संवर रहा भविष्य - फोटो : SOCIAL MEDIA

Patna :बिहार की सियासत और समाज के बीच एक नई उम्मीद की लकीर खिंचती नजर आ रही है। जीविका दीदियां अब सिर्फ स्वावलंबन की मिसाल नहीं रहीं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य गढ़ने की अहम भूमिका में उतर चुकी हैं। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और एकरूप पोशाक उपलब्ध कराकर ये दीदियां न सिर्फ अपने हाथों के हुनर को निखार रही हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मजबूत बुनियाद भी रख रही हैं।

जीविका दीदियों द्वारा बच्चों की ड्रेस सिलाई की यह मुहिम अब एक बड़े आर्थिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। सरकार ने इस योजना के तहत 225 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य तय किया है, जिसे आने वाले समय में पूरा किए जाने की तैयारी है। इसका सीधा लाभ दो स्तरों पर दिख रहा है—एक तरफ आंगनबाड़ी के मासूमों को आकर्षक और टिकाऊ पोशाक मिल रही है, वहीं दूसरी ओर समूह की दीदियों के लिए सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खुला है।

वर्ष 2022 में शुरू हुई “जीविका दीदी की सिलाई घर” योजना आज कई जिलों में अपने पांव जमा चुकी है। राज्य के 15 जिलों में 25 आधुनिक सिलाई सह उत्पादन केंद्र और प्रखंड स्तर पर 1050 सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर काम के लिए 45 हजार 945 जीविका दीदियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से 23 हजार 535 दीदियां सक्रिय रूप से ड्रेस सिलाई के काम में जुट चुकी हैं। यह आंकड़े खुद बयां करते हैं कि यह पहल केवल योजना नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक–आर्थिक बदलाव है।

जीविका दीदियों की इस मुहिम के तहत आने वाले समय में 1 लाख 13 हजार 971 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों का ड्रेस उपलब्ध कराने की तैयारी है। अनुमान है कि राज्य भर में करीब 50 लाख बच्चों को हर साल दो सेट यूनिफॉर्म दी जाएगी। नोडल अधिकारियों के मुताबिक, एक जीविका दीदी प्रतिदिन औसतन 8 से 10 ड्रेस सिल रही हैं। सहूलियत के लिए क्लस्टर लेवल फेडरेशन स्तर पर 15–20 और केंद्रीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्रों पर 60–70 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।

योजना की कामयाबी को देखते हुए सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी यूनिफॉर्म की सिलाई जीविका दीदियों से ही कराई जाएगी। यह कदम न सिर्फ रोजगार सृजन को नई रफ्तार देगा, बल्कि बिहार की राजनीति में सशक्त महिला सशक्त समाज के नारे को जमीन पर उतारने की ठोस कोशिश भी साबित होगा।