बिहार में 'इंसान और जानवर' के बीच खत्म होगा संग्राम! पटना में जुटी दिग्गजों की टोली; सम्राट चौधरी ने बताया 'मिशन 15%' का सच
पटना में "मानव-वन्यजीव: द्वंद्व से सह-अस्तित्व की ओर" विषय पर कार्यशाला आयोजित। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने वन्यजीव संरक्षण और वन विस्तार पर दिए कड़े निर्देश।
Patna - : : राजधानी पटना के होटल ताज सिटी सेंटर में शनिवार को बिहार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा एक हाई-प्रोफाइल कार्यशाला “मानव-वन्यजीव : द्वंद्व से सह-अस्तित्व की ओर” का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मंथन में राज्य के आला नेताओं और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब इंसान और जानवरों को एक-दूसरे के दुश्मन के बजाय पूरक के रूप में देखा जाए। कार्यक्रम में न केवल 'भीम बांध वन्यप्राणी आश्रयणी सर्वे रिपोर्ट' का विमोचन हुआ, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए नई कार्ययोजना की नींव भी रखी गई।
विकास और विनाश के बीच संतुलन: उपमुख्यमंत्री का बड़ा बयान

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि विकास की परियोजनाओं में कम से कम वृक्षों का पातन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि पिछले दो दशकों में बिहार का वन क्षेत्र 6% से बढ़कर 15% तक पहुंच गया है। सम्राट चौधरी ने कहा, "हम हरियाली बढ़ाकर संघर्ष को कम कर रहे हैं। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत हर पंचायत को हरा-भरा बनाया गया है। यदि विकास के लिए एक पेड़ कटेगा, तो उससे कहीं अधिक पेड़ लगाए जाएंगे।"
फलदार वृक्षों से रुकेगा वन्यजीवों का पलायन: सांसदों का सुझाव

कार्यशाला में बक्सर, आरा और वाल्मीकिनगर के सांसदों ने जमीनी हकीकत पर आधारित कड़े सुझाव दिए। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने सुझाव दिया कि अगर जंगलों में ही पर्याप्त फलदार वृक्ष लगाए जाएं, तो वन्यजीव भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर नहीं आएंगे। आरा सांसद सुदामा प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया कि हमें उन कारणों की तह तक जाना होगा कि आखिर जानवर अपना प्राकृतिक आवास छोड़ क्यों रहे हैं। वहीं, वाल्मीकिनगर सांसद सुनील कुमार ने इंसान और वन्यजीव के सह-अस्तित्व को अनिवार्य बताया।
तकनीक और परंपरा का संगम: मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार का संकल्प
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने पारंपरिक मूल्यों की ओर लौटने और पारंपरिक वृक्षारोपण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ-साथ हमारी विरासत ही वन्यजीवों को बचा सकती है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान करते हुए 'वन्यजीव कॉरिडोर' के संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग को संघर्ष कम करने का सबसे सटीक हथियार बताया।
तकनीकी सत्र में छिड़ा मंथन, निकले समाधान के रास्ते
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित तकनीकी सत्र में विभिन्न जिलों से आए जनप्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों और वन विभाग के अधिकारियों ने 'वर्किंग ग्रुप्स' में बंटकर गहन चर्चा की। इस सत्र का एकमात्र उद्देश्य नीति निर्माण के लिए ऐसे व्यावहारिक मॉडल तैयार करना था, जो न केवल कागजों पर हों बल्कि धरातल पर भी मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाली हिंसक घटनाओं को शून्य कर सकें।
दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया हौसला
इस महत्वपूर्ण आयोजन में विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रभात कुमार गुप्ता और मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार समेत बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पूरी कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार अब केवल वन नहीं बढ़ा रहा, बल्कि वनों के साथ रहने वाली पूरी जैव-विविधता के संरक्षण के लिए एक 'स्मार्ट और मानवीय' दृष्टिकोण अपना रहा है।