Bihar Transport News : बिहार में ग्रीन ट्रांसपोर्ट की लहर, जल्द दौड़ेंगी 400 इलेक्ट्रिक एसी बसें, पटना को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

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PATNA : बिहार में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) के बेड़े में जल्द ही 400 नई इलेक्ट्रिक एसी बसें शामिल होने जा रही हैं। इन अत्याधुनिक बसों के आने से न सिर्फ यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा, बल्कि राज्य में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार अब नई बसों की खरीद में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।

इन 400 बसों में से सबसे बड़ा हिस्सा राजधानी पटना को मिलने जा रहा है। पटना के लिए कुल 150 बसें आवंटित की गई हैं, जिनमें से 75 बसों का परिचालन शहर के भीतर 'सिटी बस' के रूप में किया जाएगा। वहीं, शेष 75 बसों को पटना से राजगीर, बिहारशरीफ जैसे प्रमुख इंट्रासिटी रूटों पर चलाने की योजना है। परिवहन निगम के अनुसार, प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस में लगभग 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान भी लोगों को सुलभ परिवहन मिल सकेगा।

ई-बसों के सुचारू संचालन के लिए जिलों में बुनियादी ढांचे का विकास युद्ध स्तर पर चल रहा है। निगम के मुताबिक, पूर्णिया में ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, गया में 60 प्रतिशत और पटना व मुजफ्फरपुर में 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। भागलपुर और दरभंगा में भी निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इन विशेष चार्जिंग स्टेशनों पर एक बस को चार्ज होने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा, जिससे परिचालन में कोई बाधा नहीं आएगी।

पटना में चार्जिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फुलवारीशरीफ डिपो और आईएसबीटी (ISBT) बैरिया सहित निगम के सभी डिपो को आधुनिक बनाया जा रहा है। यहां प्रति 50 बसों के बेड़े के लिए 8 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाएंगे। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि बसों को वापस रूट पर भेजने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि इन स्टेशनों के चालू होते ही बसों का परिचालन पूरे राज्य में निर्बाध रूप से शुरू कर दिया जाए।

बिहार में हरित परिवहन के अब तक के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से संचालित सीएनजी और ई-बसों के कारण अब तक लगभग 25 लाख लीटर डीजल की खपत में कमी आई है। इससे न केवल आर्थिक बचत हुई है, बल्कि लगभग 7 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को भी रोका गया है। 400 नई बसों के सड़कों पर उतरने के बाद कार्बन फुटप्रिंट में और भी बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है, जो स्वच्छ बिहार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।