Buddha Purnima : बोधगया में वैश्विक चेतना का होगा महासंगम, बुद्ध पूर्णिमा पर 40 देशों के साधकों संग पधारीं जगद्गुरु साईं माँ
GAYAJI : भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में अपनी चमक बिखेर रही है। बुद्ध पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर 2,700 वर्ष पुरानी वैष्णव परंपरा की प्रथम महिला विष्णुस्वामी जगद्गुरु, जगद्गुरु श्री साईं माँ लक्ष्मी देवी धर्मनगरी पहुंच चुकी हैं। उनके आगमन से बोधगया की आध्यात्मिक ऊर्जा चरम पर है। गुरुवार को हयात रीजेंसी में आयोजित एक विशेष संवाद के दौरान साईं माँ ने अंतरराष्ट्रीय शिष्य प्रतिनिधिमंडल और मीडिया के साथ आत्मबोध और शांति के दर्शन साझा किए।
यह आयोजन पूर्व और पश्चिम की आध्यात्मिक धाराओं के एक अनूठे संगम के रूप में देखा जा रहा है। इस एक सप्ताह चलने वाले समागम में अमेरिका, यूरोप और एशिया सहित 40 से अधिक देशों के लगभग 90 अंतरराष्ट्रीय साधक भाग ले रहे हैं। इनके साथ 20 भारतीय साधक और कई प्रमुख संत-महात्मा, महामंडलेश्वर और आध्यात्मिक गुरु भी ध्यान और सत्संग के लिए यहां जुटे हैं। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम मानवता को शांति और एकता का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
बोधगया पहुंचते ही साईं माँ ने अपने अनुयायियों को 'मौन संदेश' के जरिए आत्म-चिंतन का आह्वान किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपनी भूमिकाएं, धन, संबंध, शरीर और अहंकार का त्याग करना चाहिए, क्योंकि जो अंत में शेष बचता है, वही वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने बोधगया को 'स्वयं की पहचान की भूमि' बताते हुए कहा कि यह वही पावन स्थल है जहां मानवीय प्रयासों का अंत और दिव्य चेतना का आरंभ होता है। उनके इस संदेश को अनुयायी आत्मबोध का महामंत्र मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग गुरु स्वामी संतोषानंद महाराज ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह कई पीढ़ियों में मिलने वाला एक दुर्लभ अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि बोधगया की इस धरती से निकलने वाला विश्व शांति और सनातन चेतना का संदेश पूरी दुनिया में मानवता का कल्याण करेगा। उनके अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में विदेशी साधकों और भारतीय संतों का एक साथ जुटना न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
आगामी कार्यक्रमों की श्रृंखला में 2 मई को वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ में 'चेतना का विज्ञान एवं आंतरिक शांति' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसके अगले दिन, 3 मई को श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में विष्णु-लक्ष्मी कृपा महायज्ञ और सनातन संत सम्मेलन होगा। इस दिन एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश के संत और स्थानीय श्रद्धालु एक साथ शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों को लेकर पूरे बोधगया में सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।