बिहार में कमजोर वर्गों को मिलेगा त्वरित न्याय: DSP (विशेष अपराध) को मिले नए अधिकार, अब महिला और SC/ST थानों की करेंगे सीधी मॉनिटरिंग

बिहार सरकार ने प्रदेश के सभी 44 जिलों में डीएसपी (विशेष अपराध) को अतिरिक्त अधिकार दिए हैं । अब वे सीधे तौर पर महिला और कमजोर वर्गों से जुड़े संवेदनशील मामलों के अनुसंधान और अभियोजन की मॉनिटरिंग करेंगे

बिहार में कमजोर वर्गों को मिलेगा त्वरित न्याय: DSP (विशेष अप

Patna - बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने एक महत्वपूर्ण संकल्प जारी करते हुए पुलिस उपाधीक्षक (विशेष अपराध) के कार्यक्षेत्र और दायित्वों का विस्तार किया है अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अंतर्गत कमजोर वर्गों के लिए न्याय प्रक्रिया को सुगम बनाने हेतु यह निर्णय लिया गया है इस नए आदेश के तहत प्रदेश के सभी 44 जिलों (रेल जिला सहित) में कार्यरत डीएसपी स्तर के अधिकारियों को अब अतिरिक्त पर्यवेक्षी अधिकार दिए गए हैं

संवेदनशील कांडों के पर्यवेक्षण का नया दायित्व

गृह विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार, अब जिलों में पदस्थापित पुलिस उपाधीक्षक (विशेष अपराध) को पूर्व निर्धारित कार्यों के अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई हैं इन्हें महिला थाना, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) थाना और मानव व्यापार निरोध इकाई (AHTU) के कांडों के पर्यवेक्षण (Supervision) का दायित्व दिया गया है सरकार का मानना है कि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों की अत्यधिक व्यस्तता के कारण इन विशिष्ट मामलों की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही थी, जिसे अब सुधारा जा सकेगा

मानव व्यापार निरोध इकाई का पुनर्गठन

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए जिलों में गठित मानव व्यापार निरोध इकाई (AHTU) के संचालन में भी बदलाव किया गया है । अब ए.एच.टी.यू. (AHTU) को महिला थाना के साथ 'टैग' कर दिया गया है और इसे महिला थाना परिसर में ही स्थापित किया जाएगा  यह इकाई अब सीधे तौर पर अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस उपाधीक्षक (विशेष अपराध) के नियंत्रण में रहकर कार्य करेगी

अनुसंधान और अभियोजन की होगी प्रभावी मॉनिटरिंग

पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है कि महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण कांडों के अनुसंधान नियंत्रण में तेजी लाई जाए पुलिस उपाधीक्षक (विशेष अपराध) की क्षमताओं का पर्याप्त सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अभियोजन (Prosecution) की नियमित 'Monitoring' का जिम्मा भी सौंपा गया है । इससे अदालती प्रक्रियाओं और अपराधियों को सजा दिलाने के कार्यों में गति आने की संभावना है।

राज्यपाल के आदेश से तत्काल प्रभाव से लागू

यह संकल्प बिहार के राज्यपाल के आदेश से सरकार के अवर सचिव रत्नेश कुमार द्वारा निर्गत किया गया है विभाग ने इस आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक, प्रधान महालेखाकार और सभी जिला पदाधिकारियों सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी है 16 मार्च 2026 को जारी इस आदेश को गृह विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड करने का निर्देश दिया गया है