BSSC की सुस्ती से फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा : 34 महीने बाद भी परीक्षा तिथि घोषित न होना घोर अन्याय, छात्र नेता दिलीप ने दी आंदोलन की चेतावनी

बीएसएससी द्वितीय इंटर स्तरीय बहाली का विज्ञापन जारी होने के तकरीबन 3 साल बीत जाने के बाद भी परीक्षा की तिथि घोषित नहीं होने से छात्रो में भारी नाराजगी व्याप्त है। इस मामले को लेकर छात्र नेता दिलीप ने आंदोलन की चेतावनी दी है....

BSSC की सुस्ती से फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा : 34 महीने बाद
BSSC की सुस्ती से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की सुस्ती और लेटलतीफी के रवैये के खिलाफ बिहार के लाखों अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष और छात्र नेता दिलीप कुमार ने सोमवार को एक वीडियो जारी कर सीधे आयोग और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि महीनों और सालों बीत जाने के बाद भी आयोग द्वारा परीक्षाओं की तिथियों का ऐलान न करना राज्य के युवाओं के साथ घोर अन्याय है। छात्र नेता ने लाखों अभ्यर्थियों के हित में 'द्वितीय इंटर स्तरीय', 'चतुर्थ स्नातक स्तरीय' और 'प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (BSO)' की परीक्षाओं का शेड्यूल अविलंब घोषित करने की पुरजोर मांग की है।


34 महीने बीतने के बाद भी पीटी परीक्षा का अता-पता नहीं

छात्र नेता दिलीप कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बीएसएससी द्वितीय इंटर स्तरीय बहाली का विज्ञापन 27 सितंबर 2023 को निकाला गया था। शुरुआत में यह बहाली 11,098 सीटों के लिए आई थी, जो बाद में बढ़कर 26,426 हो गई। इस परीक्षा के लिए राज्यभर से 36 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि करीब 34 महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी आयोग अब तक इसके प्रारंभिक परीक्षा (PT) की तिथि तक घोषित नहीं कर सका है, जिससे छात्र मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।


पचास लाख से अधिक युवाओं के भविष्य पर असमंजस

सिर्फ इंटर स्तरीय ही नहीं, बल्कि आयोग की अन्य महत्वपूर्ण बहालियां भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई हैं। दिलीप कुमार के अनुसार, चतुर्थ स्नातक स्तरीय बहाली का विज्ञापन 4 अगस्त 2025 को 1064 सीटों के लिए आया था, जिसमें अब सीटों की संख्या बढ़कर 1883 हो चुकी है। इसी तरह प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी (BSO) के 682 पदों के लिए मार्च 2025 में ही विज्ञापन जारी किया गया था। इन दोनों ही बड़ी परीक्षाओं की तिथियों को लेकर भी आयोग ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। कुल मिलाकर राज्य के 50 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस समय हताश और निराश हैं।


बीच बहाली में 25% संविदा वेटेज देने का कड़ा विरोध

वीडियो संदेश में छात्र नेता ने आयोग द्वारा नियमों में किए गए हालिया बदलावों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसएससी ने बीच बहाली के दौरान ही परीक्षाओं में 25% संविदा वेटेज (अनुभव अंक) का नया प्रावधान जोड़ दिया है। यह नियम सीधे तौर पर बेरोजगार और दिन-रात मेहनत करने वाले मेधावी अभ्यर्थियों के अधिकारों पर कुठाराघात है। दिलीप कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि बहाली के बीच में संविदा वेटेज का यह खेल दरअसल भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और धांधली-सेटिंग का एक नया और सुरक्षित रास्ता तैयार करने की साजिश है।


10 दिनों का अल्टीमेटम, वरना BSSC कार्यालय पर होगा महाआंदोलन

लगातार उपेक्षा से नाराज छात्र संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने सरकार और बिहार कर्मचारी चयन आयोग को स्पष्ट रूप से 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने मांग की है कि आयोग अगले 10 दिनों के भीतर अपनी सभी लंबित परीक्षाओं के आयोजन की तिथि घोषित करे और इस विवादित संविदा वेटेज के नियम को तत्काल वापस ले। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर छात्रों की मांगें पूरी नहीं की गईं, तो बिहार के लाखों अभ्यर्थी सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे और बीएसएससी कार्यालय के बाहर एक विशाल एवं निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा।


नरोत्तम की रिपोर्ट