बिहार में शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया पर सख्ती: गृह विभाग ने तय की समय-सीमा, हर महीने इस तारीख को देनी होगी रिपोर्ट
बिहार सरकार ने शस्त्र लाइसेंस (Arms License) के आवेदनों के लिए आयुध नियम 2016 के तहत नई समय-सीमा तय की है। अब जिलों को हर महीने की 7 तारीख तक गृह विभाग को देनी होगी रिपोर्ट।
Patna - बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने राज्य में शस्त्र अनुज्ञप्ति (आर्म्स लाइसेंस) के आवेदनों के निपटारे को लेकर कड़ा रुख अपनाया है । सरकार के संयुक्त सचिव अमलेन्दु कुमार सिंह ने सभी जिला दण्डाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि शस्त्र लाइसेंस से जुड़े सभी लंबित और नए मामलों का निष्पादन 'आयुध नियम, 2016' के तहत अनिवार्य रूप से किया जाए । विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की स्वीकृति में होने वाली देरी को अब गंभीरता से लिया जाएगा और इसकी नियमित निगरानी की जाएगी ।
आयुध नियम, 2016 का कड़ाई से पालन
सरकार ने अधिकारियों को याद दिलाया है कि गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित आयुध नियम, 2016 राज्य में 15 जुलाई 2016 से ही प्रभावी है । इस नियम के अंतर्गत नियम-13 और नियम-14 में शस्त्र अनुज्ञप्ति की स्वीकृति और अभ्यावेदनों के निष्पादन के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है । संयुक्त सचिव ने अपने पत्र में इन नियमों का दृढ़ता से अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है ताकि आवेदकों को अनावश्यक प्रशासनिक चक्कर न काटने पड़ें ।
मासिक प्रगति रिपोर्ट देना हुआ अनिवार्य
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग ने एक नई रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की है । अब सभी जिलों को प्रत्येक माह की 7वीं तिथि तक शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों के निष्पादन संबंधी प्रतिवेदन (रिपोर्ट) विभाग को उपलब्ध कराना होगा । इसके लिए विभाग ने एक विस्तृत प्रपत्र भी जारी किया है, जिसमें प्राप्त आवेदनों की कुल संख्या, निष्पादित मामले और लंबित आवेदनों का पूरा ब्यौरा देना होगा ।
90 दिनों से अधिक लंबित मामलों पर पैनी नजर
सरकार द्वारा जारी नए प्रपत्र में विशेष रूप से उन आवेदनों की जानकारी मांगी गई है जो 90 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं । जिलों को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन कारणों से इन आवेदनों का समय पर निष्पादन नहीं हो सका । इसमें ऑफलाइन प्राप्त आवेदनों के साथ-साथ 'NDAL/ALIS Portal' के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की संख्या का भी अलग-अलग विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है ।
निगरानी के लिए प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को भी इस आदेश की प्रतिलिपि भेजी गई है । उनसे अनुरोध किया गया है कि वे अपने स्तर से भी जिलों में शस्त्र लाइसेंस के आवेदनों के निष्पादन का नियमित अनुश्रवण (Monitoring) करें । इसके अतिरिक्त, गृह विभाग के आईटी मैनेजर को निर्देश दिया गया है कि वे इस महत्वपूर्ण सूचना को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करें ताकि आम नागरिक भी नियमों के प्रति जागरूक हो सकें ।