पोस्टमॉर्टम में 'झूठ' बोलना पड़ा भारी! 3 डॉक्टरों पर गिरी गाज, मानवाधिकार आयोग के आदेश पर सरकार ने किया सस्पेंड

जमुई में पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत के बाद गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

पोस्टमॉर्टम में 'झूठ' बोलना पड़ा भारी! 3 डॉक्टरों पर गिरी गा

  • Patna  - बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने जमुई जिला प्रशासन और चिकित्सा जगत में हड़कंप मचाते हुए तीन चिकित्सा पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है । यह कार्रवाई जमुई के चकाई थाना क्षेत्र के निवासी सिद्ध कोड़ा उर्फ मुंशी दा की 22 फरवरी 2020 को पुलिस हिरासत में हुई मृत्यु और उसके बाद की गई दोषपूर्ण पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के कारण की गई है । विभाग ने डॉ. नागेन्द्र कुमार, डॉ. देवेन्द्र कुमार और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद के विरुद्ध यह कड़ा कदम उठाया है ।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाने का संगीन आरोप

    न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, जमुई की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि डॉक्टरों के दल ने पोस्टमॉर्टम के दौरान वास्तविक तथ्यों को जानबूझकर छिपाया । जांच में पाया गया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्वतंत्र गवाहों के नाम दर्ज नहीं किए गए और न ही मृत्यु के कारणों को स्पष्ट करने वाली विशिष्टियों का उल्लेख किया गया । सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मृतक के नाक, कान और मुँह से खून निकलने तथा शरीर पर मौजूद कटे के निशानों का रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं था ।

    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर एक्शन

    यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के समक्ष विचाराधीन था । आयोग ने 29 अक्टूबर 2025 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि दोषपूर्ण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले चिकित्सकीय दल के विरुद्ध कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाए । इसी आदेश के अनुपालन में स्वास्थ्य विभाग ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत तीनों अधिकारियों को निलंबित करने की अधिसूचना जारी की है ।

    निलंबन के दौरान पटना रहेगा मुख्यालय

    स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव उपेन्द्र राम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में डॉ. नागेन्द्र कुमार, डॉ. देवेन्द्र कुमार और डॉ. सैयद नौशाद अहमद का मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया गया है । इस दौरान इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, लेकिन वे बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे । सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन पर लगे गंभीर आरोपों की विस्तृत जांच के लिए अलग से विभागीय कार्यवाही संचालित की जाएगी ।

    प्रशासनिक अमले में हड़कंप, जल्द शुरू होगी विभागीय जांच

    इस बड़ी कार्रवाई की प्रतियां महालेखाकार, जिला पदाधिकारी जमुई और मुंगेर प्रमंडल के स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई हैं । गृह विभाग (विशेष शाखा) के पत्रों के आलोक में की गई इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों में भी हड़कंप है । सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता की कमी और कर्तव्यहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।