Bihar Health News:बिहार में घर घर पहुंचने लगी स्वास्थ्य सेवा, माताओं और बच्चों की सुरक्षा का कवच बनीं ANM-आशा, ऐसे संभाल रहीं सेहत की कमान

Bihar Health News: गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत की निगरानी से लेकर नवजात को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण तक, बिहार में एएनएम और आशा कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी बनकर उभरी हैं।...

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घर घर पहुंचने लगी स्वास्थ्य सेवा- फोटो : X

Bihar Health News: गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत की निगरानी से लेकर नवजात को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण तक, बिहार में एएनएम और आशा कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी बनकर उभरी हैं। गांवों और दूर-दराज के टोलों में घर-घर पहुंचकर ये महिला स्वास्थ्यकर्मी गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और बच्चों के समय पर टीकाकरण के प्रति जागरूक कर रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से दूर रहने वाले परिवारों के लिए इनकी भूमिका बेहद अहम है। इनके प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।

गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच से बच्चों के टीकाकरण तक जिम्मेदारी

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित एएनसी जांच, हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर की निगरानी तथा समय पर जरूरी स्वास्थ्य परामर्श बेहद महत्वपूर्ण हैं। एएनएम इन जिम्मेदारियों को निभाने के साथ बच्चों के टीकाकरण और नवजात शिशुओं की देखभाल में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।वहीं, आशा कार्यकर्ता घर-घर सर्वे कर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की पहचान करती हैं। वे परिवारों को स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती हैं तथा गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाने में सहयोग करती हैं। दोनों के बीच समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत होती है।

समय पर टीकाकरण और ऑनलाइन पंजीकरण पर जोर

स्वास्थ्य उपकेंद्र देवकली में कार्यरत एएनएम मंजू कुमारी गोकुलपुर आंगनवाड़ी केंद्र पर माताओं और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की ड्यू लिस्ट तैयार की जाती है। इसके आधार पर आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लाभार्थियों को निर्धारित दिन पर केंद्र तक बुलाती हैं।मंजू कुमारी के मुताबिक, लाभार्थियों का मोबाइल नंबर और आईडी लेकर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाता है। इसके बाद बच्चों को निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार टीके लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को 12 बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण की सुविधा दी जा रही है और आवश्यक वैक्सीन समय पर उपलब्ध हो जाती हैं।उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार के प्रति आभार जताया।

 घर-घर सर्वे से सुरक्षित प्रसव तक निभा रहीं जिम्मेदारी

कंचनपुर में आशा कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत कंचन कुमारी ग्रामीण परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी पहुंचाने में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि फील्ड में सर्वे के दौरान परिवारों का विवरण जुटाया जाता है और गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाती है। इसके बाद उन्हें अस्पताल लाकर एएनसी जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है।

कंचन कुमारी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की जांच और प्रसव की तैयारी में सहयोग करना उनके काम का अहम हिस्सा है। गर्भावस्था के नौ महीने पूरे होने पर वे महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने में मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि उनके काम के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में अहम भूमिका

गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच, जोखिम के लक्षणों की पहचान, संस्थागत प्रसव और नवजात की उचित देखभाल मां और बच्चे की जान बचाने में महत्वपूर्ण हैं। एएनएम और आशा कार्यकर्ता इन सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाकर महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार जानकारी की कमी, दूरी या दूसरी परेशानियों के कारण महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में महिला स्वास्थ्यकर्मियों का नियमित संपर्क उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद करता है। हालांकि, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार का आकलन आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम कड़ी को मजबूत बना रहीं महिला स्वास्थ्यकर्मी

एएनएम और आशा कार्यकर्ता केवल टीकाकरण या सर्वे तक सीमित नहीं हैं। वे गर्भवती महिलाओं को पोषण, नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और नवजात की देखभाल के प्रति जागरूक करने में भी योगदान देती हैं। स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा संस्थानों और स्थानीय समुदाय के बीच समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।गांव-गांव तक पहुंचकर ये महिला स्वास्थ्यकर्मी माताओं और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ रही हैं। उनकी सक्रियता सुरक्षित मातृत्व की दिशा में प्रयासों को मजबूती देती है और ग्रामीण परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करती है।

ब्यूरो रिपोर्ट