बिहार में भ्रष्ट पूर्व अधिकारी पर गिरी गाज! ₹1 लाख रिश्वत कांड में फँसे पूर्व SDM की पेंशन पूरी तरह बंद, सरकार का ऐतिहासिक फैसला

बिहार के जयनगर के तत्कालीन एसडीएम गुलाम मुस्तफा अंसारी की 100% पेंशन पर स्थायी रोक। रिश्वतखोरी के मामले में बिहार सरकार ने पुनर्विलोकन याचिका को किया खारिज।

बिहार में भ्रष्ट पूर्व अधिकारी पर गिरी गाज! ₹1 लाख रिश्वत का

Patna - बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और जयनगर के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) गुलाम मुस्तफा अंसारी के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है । सरकार ने रिश्वतखोरी के एक प्रमाणित मामले में सेवानिवृत्त हो चुके श्री अंसारी की शत-प्रतिशत (100%) पेंशन पर स्थायी रूप से रोक लगाने के आदेश को बरकरार रखा है । अनुशासनिक प्राधिकार ने अधिकारी द्वारा दायर पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (Review Petition) को पूरी तरह से अस्वीकृत कर दिया है 

आवास पर बरामद हुई थी एक लाख की रिश्वत

यह पूरा मामला साल 2016 का है, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जयनगर में तैनात तत्कालीन एसडीएम के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी 。 श्री अंसारी पर आरोप था कि उन्होंने परिवादी रामवृक्ष साह से ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की रिश्वत की मांग की थी । निगरानी विभाग की छापेमारी के दौरान उनके सरकारी आवास से उनके अर्दली के पास से वे चिह्नित नोट (जी.सी. नोट) बरामद किए गए थे, जो प्री-ट्रैप मेमोरेंडम में अंकित थे । इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भी भेजा गया था 

विभागीय जांच में पूर्णतः प्रमाणित हुए सभी आरोप

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की थी । जांच के दौरान विभिन्न गवाहों के परीक्षण, प्रतिपरीक्षण और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्ट आचरण किया था । संचालन पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि आरोपित अधिकारी अपने विरुद्ध लगे आरोपों को खारिज करने हेतु कोई भी प्रासंगिक साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहे 

पात्रता और पेंशन कटौती का कड़ा निर्णय

जांच रिपोर्ट और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से प्राप्त परामर्श के आधार पर सरकार ने बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-43 (बी) के तहत दंडादेश पारित किया था । इसके तहत श्री अंसारी की 100% पेंशन की स्थायी कटौती सुनिश्चित की गई । अधिकारी ने अपने बचाव में यह तर्क दिया था कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन विभाग ने स्पष्ट किया कि विभागीय और आपराधिक कार्यवाही दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और गंभीर आरोपों में सजा का प्रावधान उचित है 

पुनर्विलोकन याचिका खारिज, आदेश अंतिम रूप से प्रभावी

श्री अंसारी द्वारा दायर पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में उठाए गए प्रक्रियात्मक त्रुटियों के दावों को अनुशासनिक प्राधिकार ने 'असत्य' और 'गुमराह करने वाला' करार दिया है । सरकार ने 6 अप्रैल 2026 को जारी अपने नए संकल्प के माध्यम से यह साफ कर दिया है कि पूर्व में दी गई शत-प्रतिशत पेंशन कटौती की शास्ति पूर्ववत् बरकरार रहेगी । यह आदेश बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाएगा, जो भ्रष्टाचार में संलिप्त अन्य अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है