पंचायत प्रतिनिधियों के लिए 'कवच' तैयार: नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, अब तय समय में मिलेगा गन लाइसेंस, डीएम-एसपी को सख्त अल्टीमेटम

बिहार सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब मुखिया और सरपंचों के आर्म्स लाइसेंस आवेदन का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर करना होगा।

पंचायत प्रतिनिधियों के लिए 'कवच' तैयार: नीतीश सरकार का बड़ा

Patna - बिहार सरकार के गृह विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम कचहरी के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए शस्त्र लाइसेंस (आर्म्स लाइसेंस) की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और तेज करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है । विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब जनप्रतिनिधियों से प्राप्त आवेदन पत्रों का निपटारा एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर करना अनिवार्य होगा । यह आदेश आयुध नियम, 2016 के तहत निर्धारित समय-सीमा के पालन को सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है 

यह कदम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा की गई उस घोषणा के आलोक में उठाया गया है, जिसमें उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा और शस्त्र लाइसेंस संबंधी आवेदनों के त्वरित निष्पादन पर बल दिया था । मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पंचायती राज विभाग ने गृह विभाग से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था । सरकार का मानना है कि इससे जनप्रतिनिधियों को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखने की अनुमति मिलने में हो रही देरी समाप्त होगी 

गृह विभाग की उप सचिव किरण माला पँवरिया ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और वरीय पुलिस अधीक्षकों (SSP/SP) को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं । पत्र में कहा गया है कि पंचायती राज जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शस्त्र अनुज्ञप्ति के आवेदनों को आयुध नियम, 2016 के नियम-13 और नियम-14 के प्रावधानों के तहत तय सीमा के भीतर ही निष्पादित किया जाए । पुलिस और जिला प्रशासन को अब इन आवेदनों पर बिना किसी अनावश्यक विलंब के कार्रवाई करनी होगी 

इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए गृह विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को भी सूचित किया है और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे अपलोड करने के निर्देश दिए हैं । सरकार के इस निर्णय से राज्य के हजारों मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के साथ-साथ ग्राम कचहरी के सरपंचों और पंचों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है । इससे पहले इन आवेदनों के लंबित रहने की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती थीं।

प्रशासनिक स्तर पर इस सुधार का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाना और उन्हें कानून के दायरे में रहकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर प्रदान करना है । अब देखना यह होगा कि जिला स्तर पर इन निर्देशों का पालन कितनी मुस्तैदी से किया जाता है । गृह विभाग ने साफ कर दिया है कि समय-सीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है