भवन निर्माण विभाग में वित्तीय 'अंधेरगर्दी': पिछले साल का हिसाब गोल, अब नए सिरे से बजट की मांग; सरकारी खजाने पर भारी सुस्ती

बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग में वित्तीय प्रबंधन फेल हो गया है। विभाग को यह नहीं पता कि पिछले साल कितना भुगतान हुआ, अब पुरानी मांगों को रद्द कर नए सिरे से बजट मांगा जा रहा है।

भवन निर्माण विभाग में वित्तीय 'अंधेरगर्दी': पिछले साल का हिस

Patna - : बिहार का भवन निर्माण विभाग वित्तीय प्रबंधन के मामले में पूरी तरह पटरी से उतरता नजर आ रहा है। विभाग के अपर सचिव राजेश कुमार सिंह द्वारा जारी एक पत्र ने सरकारी कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। मामला इतना गंभीर है कि विभाग को यह तक स्पष्ट नहीं है कि पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित करोड़ों रुपये की राशि में से कितना भुगतान हुआ और कितनी राशि फाइलों में दबी रह गई।

पिछले साल की मेहनत पर पानी, पुरानी मांगों को माना 'रद्दी'

विभाग ने अपनी विफलता को छिपाने के लिए एक अजीबोगरीब आदेश जारी किया है। पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न योजनाओं के लिए भेजी गई पुरानी अधियाचनाओं (Demands) को अब "निरस्त" मान लिया गया है। यानी पिछले एक साल से इंजीनियरों और ठेकेदारों द्वारा किए गए कागजी दावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है और अब सब कुछ नए सिरे से शुरू करने को कहा गया है।

तकनीकी खामियां और बजट की किल्लत

पत्र में स्वीकार किया गया है कि कई योजनाओं में राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण आवंटन ही नहीं हो सका। वहीं, जहाँ पैसा आवंटित किया गया था, वहाँ "तकनीकी कारणों" से भुगतान लटक गया। यह विभाग की उस गंभीर अक्षमता को दर्शाता है जहाँ योजनाओं को मंजूरी तो मिल जाती है, लेकिन भुगतान के वक्त तंत्र पूरी तरह फेल हो जाता है।

नया साल, वही पुरानी सुस्ती: मापी पुस्तिका पर संदेह

अब नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने सभी कार्यपालक अभियंताओं से "अद्यतन मापी पुस्तिका" (Latest Measurement Book) के साथ नए सिरे से अधियाचना मांगी है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यह पुरानी कमियों को छिपाने और लेखा-जोखा के घालमेल को सुलझाने की एक कोशिश है। जब विभाग को पिछले साल के लंबित भुगतान का ही हिसाब नहीं पता, तो नए बजट का पारदर्शी उपयोग कैसे होगा, यह एक बड़ा सवाल है।