'खाता किराए पर': पटना में साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल,एक बैंक अकाउंट पर 4 राज्यों में FIR

पटना के कंकड़बाग में एक दवा व्यापारी की गिरफ्तारी ने साइबर अपराध के एक खतरनाक ट्रेंड को उजागर किया है। अब ठग सीधे ठगी करने के बजाय स्थानीय व्यापारियों के बैंक खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' (Mule Account) के रूप में कर रहे हैं।

Account on rent New business model of cyber crime in Patna
'खाता किराए पर': पटना में साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल - फोटो : news 4 nation

बिहार की राजधानी पटना के कंकड़बाग में एक दवा व्यापारी की गिरफ्तारी ने साइबर अपराध के एक खतरनाक ट्रेंड को उजागर किया है। अब ठग सीधे ठगी करने के बजाय स्थानीय व्यापारियों के बैंक खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' (Mule Account) के रूप में कर रहे हैं। इस मामले में व्यापारी ने अपना करंट अकाउंट ठगों को 'रेंट' पर दे दिया था, जिससे मुख्य अपराधी की पहचान और लोकेशन पूरी तरह छिपी रही। पुलिस के हाथ केवल खाताधारक ही लगा, जबकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे से करोड़ों का ट्रांजैक्शन कर निकल गए।

20% कमीशन का भारी लालच और 'ईजी मनी' का जाल

 इस पूरे गोरखधंधे में सबसे हैरान करने वाली बात मुनाफे का गणित है। महज 6 दिनों के भीतर इस खाते से 81 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ, जिसके बदले व्यापारी को 16.20 लाख रुपये का मोटा कमीशन मिला। सामान्य दवा व्यापार में इतना मुनाफा कमाने में महीनों का समय लगता है, लेकिन 'ईजी मनी' के चक्कर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी ने चंद दिनों के लालच में अपराध का रास्ता चुन लिया। यही भारी-भरकम कमीशन अब व्यापारियों को अपराधियों के मददगार के रूप में तब्दील कर रहा है।

चार राज्यों में फैला अंतरराज्यीय जाल और ठगी का नेटवर्क 

पकड़े गए आरोपी अनिल कुमार के खाते का जाल सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दिल्ली और हरियाणा समेत चार राज्यों से जुड़े हुए हैं। इन राज्यों में इस विशेष खाते के खिलाफ पहले से ही साइबर ठगी की FIR दर्ज थीं। यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट (Pan-India Network) इतना शातिर है कि ठग एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के पीड़ित को निशाना बनाते हैं और तीसरे राज्य के व्यापारी के खाते में पैसा मंगवाते हैं। इस जटिल नेटवर्क के कारण जांच एजेंसियों के लिए मुख्य अपराधियों तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सख्त कानूनी सबक: अनजाने में दी गई मदद भी है संगीन जुर्म 

यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो थोड़े से कमीशन के लालच में अपना बैंक अकाउंट, एटीएम या नेट बैंकिंग दूसरों को दे देते हैं। कानूनी तौर पर भले ही खाताधारक ने खुद किसी को फोन कर न ठगा हो, लेकिन 'मनी लॉन्ड्रिंग' और 'धोखाधड़ी में संलिप्तता' के तहत वह मुख्य आरोपी के बराबर ही सजा का हकदार माना जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहली जिम्मेदारी खाताधारक की होती है, जो उसे सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है।