नारद संग्रहालय का होगा कायाकल्प, नए भवन निर्माण और पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण पर डीएम का जोर

नारद संग्रहालय का होगा कायाकल्प, नए भवन निर्माण और पांडुलिपि
डीएम ने नारद संग्रहालय का किया निरिक्षण- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने ऐतिहासिक नारद संग्रहालय का विस्तृत निरीक्षण कर इसकी स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संग्रहालय में सहेज कर रखी गई प्राचीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक अभिलेखों और दुर्लभ कलाकृतियों का गहन अवलोकन किया। जिलाधिकारी ने इन अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के रख-रखाव की समीक्षा करते हुए इनके वैज्ञानिक संरक्षण और भविष्य की योजनाओं को लेकर अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


जिलाधिकारी ने बताया कि संग्रहालय की वर्तमान आवश्यकताओं और पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए एक नए और आधुनिक भवन के निर्माण की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। नए भवन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए कंसल्टेंट के चयन हेतु भवन निर्माण निगम द्वारा निविदा जारी की जा चुकी है, जो आगामी 6 मई 2026 को खोली जाएगी। इसके बाद नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आएगी, जिससे इन धरोहरों को एक सुरक्षित और बेहतर स्थान मिल सकेगा।


इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रतिभा कुमारी ने 'ज्ञान भारतम मिशन' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश की समृद्ध बौद्धिक विरासत को विलुप्त होने से बचाना है। ताड़पत्र, भोजपत्र और पुराने कागजों पर लिखी गई ये पांडुलिपियाँ प्राचीन आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और स्थानीय इतिहास का खजाना हैं। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से इन अमूल्य दस्तावेजों को डिजिटल रूप में हमेशा के लिए संरक्षित किया जाएगा।


योजना की बारीकियों पर चर्चा करते हुए सुश्री कुमारी ने स्पष्ट किया कि डिजिटलीकरण के दौरान पांडुलिपियों का मूल स्वामित्व संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही रहेगा। जिला प्रशासन केवल वैज्ञानिक विधियों का उपयोग कर इनका डिजिटल बैकअप तैयार करेगा, ताकि इन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी का हिस्सा बनाया जा सके। इससे न केवल ये दस्तावेज नष्ट होने से बचेंगे, बल्कि शोधार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुलभ हो सकेंगे।


जिला प्रशासन ने नवादा के आम नागरिकों से इस सांस्कृतिक महाअभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की है। जिलाधिकारी ने अनुरोध किया है कि यदि किसी नागरिक के पास या उनकी जानकारी में कोई भी प्राचीन पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) या जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी को दें। इस पहल का उद्देश्य नवादा की गौरवशाली पहचान को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करना है।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट