Bihar News : LNMCBM मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ समापन, शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर दिया जोर

Bihar News : ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेन्ट (LNMCBM) में "विशाल भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका एवं प्रासंगिकता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया....

Bihar News : LNMCBM मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिन
राष्ट्रीय सेमिनार का समापन - फोटो : SOCIAL MEDIA

MUZAFFARPUR : मुजफ्फरपुर स्थित ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेन्ट (LNMCBM) में आईसीएसएसआर (ICSSR) द्वारा प्रायोजित "विशाल भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका एवं प्रासंगिकता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का रविवार (6 सितंबर 2026) को भव्य समापन हो गया। दो दिनों तक चले इस समागम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और प्रबंधन से जोड़ने पर अपने विचार रखे।  

तकनीकी सत्रों के दौरान महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. पी. ओमकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा और एनईपी (NEP) 2020 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय भाषा में पाठ्यक्रम सामग्री तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जेएनयू के डॉ. राम नाथ झा ने संस्कृत भाषा और वैदिक ज्ञान को आधुनिक समस्याओं के समाधान का आधार बताया। वहीं, आईआईटी पटना के प्रो. रंजन कुमार बेहेरा और संस्थान के डॉ. नीरज कुमार ने उपनिषदों और भारतीय दर्शन के सिद्धांतों को कॉरपोरेट मैनेजमेंट व तनाव प्रबंधन के आधुनिक मॉडलों से जोड़कर प्रस्तुत किया।  

समापन समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. अरुण कुमार भगत ने आचार्य सुश्रुत, चरक और आर्यभट्ट के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन मेधा और वैज्ञानिक सोच ही आज के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत आज भी हमारी ज्ञान परंपरा की मजबूत आधारशिला हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ चाइल्ड राइट प्रोटेक्शन की डॉ. वर्णिका शर्मा ने शिक्षा, धर्म और इतिहास के समायोजन को राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य बताया।  

संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार और कुलसचिव डॉ. कुमार शरतेन्दु शेखर ने कहा कि इस सेमिनार से यह बात स्पष्ट हुई है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नैतिक मूल्य, आत्मनिर्भरता और समग्र सोच ही विकसित और विशाल भारत के निर्माण की दिशा तय करेंगे। विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम आनंद झा और डॉ. आई.बी. लाल ने भी युवाओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और ज्ञानार्जन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।  

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न शोधार्थियों, छात्राओं और विद्वानों को उनके शोध पत्रों एवं प्रस्तुतियों के लिए सराहा गया। दो दिवसीय सत्र के दौरान शोधकर्ताओं ने आन्वीक्षिकी, त्रिगुण और तैत्तिरीयोपनिषद् के पंचकोष जैसे प्राचीन सिद्धांतों के जरिए आधुनिक संगठनात्मक संघर्षों को दूर करने के उपाय साझा किए। अंत में प्रबंधन संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम आनंद झा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और संकाय सदस्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।