ढाई फीट जमीन और दो लाशें! मुंगेर में सगे भाइयों ने एक-दूसरे को चाकुओं से गोदा, 8 साल की बच्ची ने दी पिता-चाचा को मुखाग्नि
मुंगेर में जमीन के महज ढाई फीट के टुकड़े के लिए दो सगे भाइयों ने एक-दूसरे का कत्ल कर दिया। 8 साल की मासूम बेटी ने पिता और चाचा दोनों की चिता को मुखाग्नि दी।
Munger - मुंगेर जिले के टेटिया बंबर थाना क्षेत्र अंतर्गत खपरा गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां जमीन के महज ढाई फीट के टुकड़े के लिए दो सगे भाइयों ने एक-दूसरे की जान ले ली। इस खूनी संघर्ष के बाद परिवार में मातम पसरा है और मासूम बच्ची द्वारा पिता व चाचा को मुखाग्नि देने के दृश्य ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
ढाई फीट जमीन के लिए सहोदर भाइयों में खूनी जंग
खपरा गांव में 20 जनवरी की सुबह करीब ढाई फीट जमीन के विवाद को लेकर सहोदर भाई शैलेश कुमार और मुकेश कुमार के बीच विवाद शुरू हुआ। बहस इतनी बढ़ी कि दोनों भाइयों ने एक-दूसरे पर चाकू से हमला कर दिया। इस हिंसा में शैलेश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मुकेश कुमार ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।
मासूम आरुषि ने दी पिता और चाचा को मुखाग्नि
मंगलवार को जब दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार किया गया, तो श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि आठ वर्षीय मासूम बच्ची आरुषि को अपने पिता और चाचा दोनों को एक साथ मुखाग्नि देनी पड़ी। कांपते हाथों से जलती चिता को अग्नि देती बच्ची के दृश्य ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया।
परिवार का इतिहास और विवाद की जड़
मृतक भाइयों के पिता स्व. राजेंद्र सिंह का पैतृक निवास असरगंज प्रखंड का चाफा गांव था। लेकिन : राजेंद्र सिंह को अपने ससुराल (खपरा गांव) में कुछ भूमि मिली थी, जिसके कारण वे वहीं बस गए थे। उसी जमीन के एक छोटे से हिस्से (ढाई फीट) को लेकर भाइयों के बीच लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था, जिसने अंततः हिंसक रूप ले लिया।
पुलिसिया कार्रवाई और गांव की स्थिति
हैरानी की बात यह है कि घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक थाने में कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया है, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी है। टेटिया बंबर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार केहरी के अनुसार, पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आवेदन मिलते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गांव में सन्नाटा पसरा है और दिल्ली से आए तीसरे भाई की रहस्यमयी अनुपस्थिति को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।