मोतिहारी में किसान मेले के बीच गरमाया पिपराकोठी वाटर पार्क का विवाद, कचहरी चौक पर किसानों का धरना

मोतिहारी में किसान मेले के बीच गरमाया पिपराकोठी वाटर पार्क क
वाटर पार्क के विरोध में किसानों का धरना- फोटो : हिमांशु

Motihari : जिले में एक ओर किसानों को केंद्र में रखकर किसान मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शामिल होने की संभावना है। वहीं दूसरी ओर, पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क निर्माण के लिए अपनी जमीन गंवाने का दावा कर रहे किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान मोतिहारी के कचहरी चौक पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए हैं, जिससे प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।


पुश्तैनी जमीन छीनने का आरोप, मामला अदालत में रहने के बावजूद निर्माण जारी आंदोलनकारी किसानों का आरोप है कि जिस जमीन पर वाटर पार्क का निर्माण कराया जा रहा है, वह उनकी पीढ़ियों पुरानी पुश्तैनी जमीन है। प्रशासनिक स्तर पर जमाबंदी रद्द कर उनकी जमीन पर जबरन कब्जा ले लिया गया और निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। किसानों ने स्पष्ट किया कि जमीन के स्वामित्व से जुड़ा यह विवाद अभी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद अदालत का अंतिम फैसला आने से पहले विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रखना उनके अधिकारों का गंभीर हनन है।


लाठीचार्ज और मुकदमों का विरोध, महिलाओं ने भी आंदोलन में झोंकी ताकत 

कचहरी चौक पर चल रहे इस प्रदर्शन में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला किसान भी बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि पूर्व में जब उन्होंने अपनी जमीन बचाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध जताया था, तब पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसाई गईं और कई किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जेल में बंद निर्दोष किसानों की अविलंब रिहाई की मांग की है।


अदालत का फैसला आने तक वाटर पार्क का निर्माण रोकने की मांग 

किसानों का कहना है कि वे क्षेत्र के विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों को उनकी आजीविका और जमीन से बेदखल करना कतई स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग की है कि जब तक न्यायालय से इस भूमि विवाद पर कोई स्पष्ट और न्यायसंगत निर्णय नहीं आ जाता, तब तक पिपराकोठी वाटर पार्क के सभी निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। किसानों के अनुसार, यदि बाद में कानूनी फैसला उनके पक्ष में आता है तो वर्तमान निर्माण से स्थिति और अधिक जटिल हो जाएगी।


मांगें न पूरी होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी 

धरनास्थल पर मौजूद किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की, तो इस जन-आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को कचहरी चौक से विस्तारित कर पूरे पूर्वी चंपारण जिले में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे। फिलहाल, इस जमीनी विवाद ने किसान मेले के आयोजन के बीच सरकार के किसान-हितैषी दावों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


हिमांशु की रिपोर्ट