मधुबनी पहुँचे 'सन ऑफ मल्लाह': माँ कमला मेला में पूजा-अर्चना कर मांगी खुशहाली

Bihar News : वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी आज मधुबनी में आयोजित मां कमला मेला में शिरकत की। वहीं लोगों को संबोधित करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि जब जात ही नहीं होगी तो भात भी नही मिलेगा...

मधुबनी पहुँचे 'सन ऑफ मल्लाह': माँ कमला मेला में पूजा-अर्चना

Madhubani : विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी शनिवार को मधुबनी जिले के अरेड़ स्थित बलाइन पहुँचे। यहाँ माँ कमला पूजा समिति द्वारा आयोजित भव्य 'माँ कमला मेला' में उन्होंने शिरकत की। 'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से चर्चित सहनी ने पूरे विधि-विधान के साथ माँ कमला की पूजा-अर्चना की और समस्त देशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान मेले में भारी संख्या में स्थानीय लोग और पार्टी कार्यकर्ता उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े।


'सत्ता की मलाई से प्यारा समाज का कल्याण' : मुकेश सहनी

मेले के अवसर पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुकेश सहनी ने निषाद आरक्षण के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उनकी लड़ाई निषादों के हक और आरक्षण की है। सहनी ने स्पष्ट किया, "हमें वैसी मलाई (सत्ता) नहीं खानी, जहाँ मैं अपने समाज का कल्याण न कर सकूँ।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य राज्यों में निषाद समाज को आरक्षण मिल सकता है, तो बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में उन्हें इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है।


'जब जात ही नहीं होगी, तो भात भी नहीं मिलेगा': मुकेश सहनी

अपने संबोधन के दौरान मुकेश सहनी ने समाज की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने एक देसी कहावत का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति में अस्तित्व बचाने के लिए एकजुटता जरूरी है। सहनी ने कहा, "जब जात ही नहीं होगी, तो भात भी नहीं मिलेगा।" उनके कहने का तात्पर्य था कि यदि निषाद समाज एकजुट होकर अपनी जातिगत शक्ति का प्रदर्शन नहीं करेगा, तो राजनीतिक दल उन्हें नजरअंदाज करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज उनके संघर्ष का ही परिणाम है कि अब सभी दल निषादों को सम्मान देने की बात कर रहे हैं।


आने वाली पीढ़ी के लिए शिक्षा और संघर्ष का आह्वान

पूर्व मंत्री ने उपस्थित जनसमूह, विशेषकर युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षित बनाने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आज हम जो मेहनत और संघर्ष कर रहे हैं, उसका उद्देश्य यही है कि हमारी आने वाली पीढ़ी को अधिकारों के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने समाज के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और एकजुट होकर राजनीतिक शक्ति बनने का आह्वान किया। सहनी ने जोर देकर कहा कि शिक्षा और एकता ही समाज के विकास की असली कुंजी है।


आयोजकों की सराहना और सामाजिक विकास का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में मुकेश सहनी ने माँ कमला मेला समिति के सदस्यों की भव्य आयोजन के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। सहनी ने जनकल्याण और सामाजिक न्याय के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वे निषाद समाज के सर्वांगीण विकास के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। मेले में उनके संबोधन के बाद समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की, जिससे राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ नजर आया।