पीके का बड़ा बयान : चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल, व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत

पूरे देश में SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, इसी बीच जन सुराज सुप्रीमो व विधायक प्रशांत किशोर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है यह पूरे सिस्टम पर सवाल

पीके का बड़ा बयान : चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध पर पीके का बड़ा बयान- फोटो : वरुण ठाकुर

Darbhanga : देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच जन सुराज के संयोजक और बांकीपुर विधान सभा क्षेत्र के विधायक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को दरभंगा में उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर लगातार उंगलियां उठती रही हैं। प्रशांत किशोर ने ज्ञानेश कुमार से पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रहे राजीव कुमार के कार्यकाल का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनके समय भी गंभीर सवाल उठे थे और सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें एचडीएफसी (HDFC) बैंक का चेयरमैन बनाया गया।


पिछले 7-8 वर्षों में चुनाव प्रक्रिया के हर स्तर पर उठे हैं गंभीर सवाल

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले सात-आठ वर्षों में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) तैयार करने, चुनाव की समय-सारिणी तय करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने और मतगणना की पारदर्शिता सहित कई स्तरों पर चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदने के मामले सामने आए हैं। जन सुराज के सूत्रधार ने कहा कि आज देश की आम जनता के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए जा रहे हैं, और यही वजह है कि आज पूरे देश में विरोध का माहौल देखने को मिल रहा है।


मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग की संपूर्ण कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि केवल व्यक्ति बदलने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने की पूरी व्यवस्था में बुनियादी बदलाव होने चाहिए। जब तक नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहेंगे।


लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनविश्वास बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती

प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ होती है। यदि जनता का विश्वास चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से उठने लगेगा, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। इसलिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि निष्पक्ष चुनाव प्रणाली में लोगों का भरोसा एक बार फिर मजबूत हो सके।

वरुण ठाकुर की रिपोर्ट