छपरा के रामराज चौक का 84 साल पुराना राम दरबार: 1942 से चली आ रही अनूठी परंपरा, नागर शैली में एक ही परिवार की पीढ़ियां संवार रही हैं मूर्तियां
Chapra : सारण जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में शहर के रामराज चौक का राम दरबार अपनी विशिष्ट पहचान संजोए हुए है। यहां वर्ष 1942 से शारदीय दुर्गापूजा के पावन अवसर पर भगवान श्रीराम के दरबार की भव्य झांकी सजाई जाती है।
पिछले 84 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस गौरवशाली परंपरा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मूर्तियों का मूल स्वरूप और निर्माण शैली आज भी पूरी तरह बरकरार है। भगवान का अलौकिक शृंगार उसी प्राचीन चांदी के आभूषणों से किया जाता है, जिन्हें वर्ष 1942 में विशेष तौर पर तैयार कराया गया था। स्थानीय जानकारों के अनुसार, आजादी से पहले यह ऐतिहासिक स्थल 'महमूद चौक' के नाम से जाना जाता था, लेकिन 1942 में राम दरबार की स्थापना के बाद से इसकी पहचान 'रामराज चौक' के रूप में स्थापित हो गई।
एक ही परिवार की पीढ़ियों द्वारा होता है निर्माण, तीन दिनों तक उमड़ते हैं श्रद्धालु
राम दरबार में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, भरत और शत्रुघ्न की लगभग चार फीट ऊंची मनमोहक मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जिन्हें पारंपरिक नागर शैली में गढ़ा जाता है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सन 1942 से लेकर आज तक एक ही परिवार की कई पीढ़ियां इन मूर्तियों का निर्माण करती आ रही हैं।
दुर्गापूजा के दौरान 'सृष्टि' के दिन विधि-विधान से पर्दा हटाकर राम दरबार को भक्तों के दर्शन के लिए खोला जाता है, जिसके बाद लगातार तीन दिनों तक श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। समिति के सदस्य एवं युवा समाजसेवी मनीष मिश्रा ने बताया कि स्थानीय बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी लोगों के निरंतर सहयोग से अपनी सांस्कृतिक गरिमा बनाए हुए है।
धर्मेन्द्र की रिपोर्ट