Bihar News : भागलपुर में अवैध और फर्जी निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर कसेगा शिकंजा, सिविल सर्जन ने 16 प्रखंडों से मांगी रिपोर्ट

Bihar News : भागलपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों को दरकिनार कर संचालित हो रहे निजी संस्थानों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब कड़ा रुख अपनाने जा रहा है।

Bihar News : भागलपुर में अवैध और फर्जी निजी स्वास्थ्य संस्था
फर्जी निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर शिकंजा- फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर नियमों को दरकिनार कर संचालित किए जा रहे संस्थानों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद के स्तर से जिले के सभी 16 प्रखंडों से ऐसे संस्थानों की सूची और विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है। CHC और PHC स्तर से अपने-अपने क्षेत्र में संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जानकारी जुटाई जा रही है। 

जांच के दायरे में

जांच के दायरे में नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, अल्ट्रासाउंड सेंटर, एक्स-रे सेंटर, पैथोलॉजी सेंटर सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थान शामिल किए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थान आवश्यक लाइसेंस, पंजीकरण और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं।

‘लाइसेंस मेरे नाम, संचालन कोई और’ तो भी होगी पड़ताल

सबसे अहम पहलू यह है कि अब केवल संस्थान के लाइसेंस और कागजात देखकर मामला खत्म नहीं होगा। जिस डॉक्टर के नाम से किसी संस्थान का लाइसेंस या पंजीकरण लिया गया है, वहां संबंधित डॉक्टर वास्तव में मौजूद रहते हैं या नहीं, इसकी भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी है। यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी संस्थान का लाइसेंस किसी डॉक्टर के नाम पर है, लेकिन संबंधित डॉक्टर वहां निर्धारित रूप से उपलब्ध नहीं रहते या उनके नाम का इस्तेमाल कर संस्थान संचालित किया जा रहा है, तो संस्थान के साथ-साथ संबंधित डॉक्टर की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच की जा सकती है। अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

16 प्रखंडों की रिपोर्ट खोलेगी कई संस्थानों की पोल?

स्वास्थ्य विभाग की नजर अब प्रखंडवार रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित संस्थानों के लाइसेंस, पंजीकरण, डॉक्टरों की उपलब्धता, संचालन व्यवस्था और निर्धारित मानकों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की यह कवायद जिले में संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बालमुकुन्द की रिपोर्ट