Bihar Doli Yatra: 200 साल पुरानी परंपरा, रामनगर राजदरबार से निकली मां दुर्गा की ऐतिहासिक डोली यात्रा, जयकारों से गूंज उठा बगहा

Bihar Doli Yatra:शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर करीब 200 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक डोली यात्रा श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली गई।

200 Year Old Durga Doli Yatra
राजदरबार से निकली मां दुर्गा की ऐतिहासिक डोली यात्रा,- फोटो : reporter

Bihar Doli Yatra: आस्था का सैलाब, परंपरा की विरासत और मां दुर्गा के जयकारों से गूंजती सड़कें। पश्चिम चंपारण के रामनगर में शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर करीब 200 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक डोली यात्रा श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली गई। रामनगर राजदरबार से कोट बंजरिया देवी स्थान तक जुड़ी इस अनूठी धार्मिक परंपरा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। करीब पांच किलोमीटर लंबे मार्ग पर जगह-जगह भक्त मां के दर्शन के लिए खड़े नजर आए। पूरा इलाका ‘जय माता दी’ और ‘जय मां दुर्गा’ के जयकारों से भक्तिमय हो उठा।

रामनगर राज परिवार की इस परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। पीढ़ियों से चली आ रही यह यात्रा राजपरिवार की धार्मिक आस्था, स्थानीय लोकविश्वास और नवरात्र के उत्सव को एक सूत्र में पिरोती है। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन इस परंपरा के प्रति लोगों की श्रद्धा आज भी बरकरार है।

षष्ठी को निमंत्रण, सप्तमी को निकलती है ऐतिहासिक डोली

इस परंपरा की शुरुआत शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि से होती है। मान्यता के अनुसार, रामनगर राजपरिवार के पुरोहित कोट बंजरिया स्थित प्रसिद्ध देवी स्थान पहुंचकर माता को राजदरबार आने का पारंपरिक निमंत्रण देते हैं। यह रस्म सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा मानी जाती है।इसके बाद सप्तमी की सुबह शुभ मुहूर्त में कहारों के साथ डोली को कोट बंजरिया देवी स्थान ले जाया जाता है। वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक परंपरा के मुताबिक, बेल को मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में डोली में विराजमान कर रामनगर राजदरबार स्थित मंदिर लाया जाता है। इसके बाद राजदरबार में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है।

पांच किलोमीटर तक उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम

कोट बंजरिया देवी स्थान से रामनगर राजदरबार तक निकलने वाली इस डोली यात्रा को देखने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। रामनगर शहर के अलावा आसपास के दर्जनों गांवों से भी लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।

डोली के गुजरने के दौरान सड़क किनारे खड़े श्रद्धालु दर्शन करते और माता के जयकारे लगाते नजर आए। पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी है।

राजपरंपरा और लोकआस्था का अनूठा संगम

रामनगर की ऐतिहासिक डोली यात्रा अपनी विशिष्ट रस्मों और धार्मिक मान्यताओं के कारण इलाके में खास पहचान रखती है। राजपरिवार के पुरोहित द्वारा निमंत्रण देने से लेकर डोली में बेल को विराजमान कर राजदरबार लाने तक, हर चरण परंपरागत विधि-विधान से जुड़ा हुआ है।यह आयोजन स्थानीय समाज में पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। नवरात्र के दौरान इस यात्रा के जरिए धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है और नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।रामनगर में निकली यह ऐतिहासिक डोली यात्रा एक बार फिर इस बात की गवाह बनी कि बदलते दौर में भी लोकआस्था और परंपराओं की जड़ें कितनी गहरी हैं। मां दुर्गा के जयकारों के बीच संपन्न हुई इस यात्रा ने रामनगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को फिर जीवंत कर दिया।

रिपोर्ट- नागेंद्र प्रसाद