Floods: जब सूरत में आई थी विनाशकारी बाढ़! डायमंड इंडस्ट्री को हुआ 1800 करोड़ का नुकसान
Flood: 2006 की सूरत बाढ़ में शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था। जानिए उकाई बांध, तापी नदी और हाई टाइड की वजह से आई बाढ़ ने सूरत के डायमंड उद्योग को कैसे करीब 1800 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।
Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने गुजरात के सूरत में अगस्त 2006 में आई विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं। आज सूरत को दुनिया भर में ‘डायमंड सिटी’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन 2006 में कुछ ही घंटों के अंदर इस शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था। इस बाढ़ ने आम जनजीवन के साथ-साथ दुनिया के बड़े हीरा कारोबार को भी भारी नुकसान पहुंचाया था।
उकाई बांध से छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी
अगस्त 2006 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में लगातार भारी बारिश हो रही थी। इसका असर तापी नदी पर बने उकाई बांध पर पड़ा और बांध में तेजी से पानी बढ़ने लगा। बांध पर दबाव कम करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी छोड़ना पड़ा। इसी दौरान समुद्र में हाई टाइड की स्थिति भी थी। तापी नदी का पानी समुद्र में तेजी से नहीं जा सका और पानी का स्तर सूरत की तरफ बढ़ गया। देखते ही देखते शहर के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया। कई इलाकों में पानी 10 से 15 फीट तक पहुंच गया था। सड़कों, घरों, दुकानों और कारखानों में पानी और कीचड़ भर गया। सूरत का जनजीवन कई दिनों तक बुरी तरह प्रभावित रहा।
हीरा कारोबार को लगा बड़ा झटका
सूरत का हीरा उद्योग इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल था। कतारगाम, वराछा और महिधरपुरा जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग यूनिट्स थीं। बाढ़ का पानी इन कारखानों में घुस गया। उस समय सूरत में करीब 6 हजार छोटी-बड़ी डायमंड यूनिट्स होने का अनुमान था। इनमें से बड़ी संख्या में यूनिट्स को भारी नुकसान हुआ। कारखानों में लगी महंगी मशीनें पानी और कीचड़ की वजह से खराब हो गईं। लेजर कटिंग मशीन, कंप्यूटर और डायमंड स्कैनर जैसी महंगी तकनीकी मशीनों को भी नुकसान पहुंचा। कई मशीनों को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाने में काफी समय और पैसा लगा।
कीचड़ में दब गए कीमती हीरे
बाढ़ का सबसे बड़ा नुकसान उन कारोबारियों को हुआ, जिनके पास कच्चे और तैयार हीरे का स्टॉक मौजूद था। कई कारखानों के बेसमेंट और निचली मंजिलों में रखे लॉकर और तिजोरियां पानी की चपेट में आ गईं। हीरे और दूसरे सामान कीचड़ में दब गए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई जगह कारोबारी और कर्मचारी कीचड़ में अपने सामान और हीरों की तलाश करते नजर आए।
हजारों कारीगरों पर पड़ा असर
सूरत का हीरा कारोबार सिर्फ बड़े व्यापारियों और कंपनियों तक सीमित नहीं था। इस उद्योग से लाखों कारीगर और कर्मचारी जुड़े हुए थे। बाढ़ के कारण कारखाने बंद हो गए और बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। कई छोटे कारोबारियों के पास पर्याप्त बीमा नहीं था। मशीनों और कारोबार को हुए नुकसान की वजह से कुछ यूनिट्स लंबे समय तक दोबारा शुरू नहीं हो सकीं।
करीब 1800 करोड़ रुपये के कारोबार को नुकसान
बाढ़ के कारण सूरत का हीरा उद्योग कई हफ्तों तक प्रभावित रहा। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, इस दौरान डायमंड सेक्टर को करीब 1,800 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ था। यह समय कारोबार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि अगस्त के आसपास अमेरिका और यूरोप के बाजारों के लिए त्योहारी सीजन के ऑर्डर तैयार किए जाते थे। सूरत में उत्पादन रुकने का असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी पड़ा। बाढ़ से शहर के दूसरे कारोबार और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ। सूरत के कुल आर्थिक नुकसान का अनुमान करीब 22 हजार करोड़ रुपये तक लगाया गया था।
कुछ महीनों में फिर शुरू हुआ कारोबार
इतने बड़े नुकसान के बावजूद सूरत के कारोबारियों और कारीगरों ने हार नहीं मानी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कारखानों की सफाई और मशीनों की मरम्मत का काम तेजी से शुरू किया गया। कई कारोबारियों और कर्मचारियों ने अतिरिक्त समय में काम करके उत्पादन दोबारा शुरू करने की कोशिश की। धीरे-धीरे डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग का काम पटरी पर लौटने लगा। 2006 की बाढ़ सूरत के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में गिनी जाती है। इसने शहर को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन इसके बाद जिस तेजी से सूरत के व्यापार और उद्योग ने वापसी की, वह शहर की कारोबारी क्षमता और लोगों के हौसले की बड़ी मिसाल बन गई।