JPSC परीक्षा घोटाला: सीआईडी जांच में बड़ा खुलासा, तीन सदस्यों और पूर्व चेयरमैन पर सेटिंग का गंभीर आरोप
JPSC) परीक्षा घोटाले की सीआईडी जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। मामले के आरोपी अभय तिवारी के बयान से आयोग के अंदर चल रहे सेटिंग के खेल की पोल खुल गई है.....
Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा घोटाले की सीआईडी जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। मामले के आरोपी अभय तिवारी के बयान और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी 'टीडीपीएल' के निदेशक रामवीर सिंह के कथित कबूलनामे से आयोग के अंदर चल रहे सेटिंग के खेल की पोल खुल गई है।
अभय तिवारी ने सीआईडी को दिए अपने बयान में जेपीएससी की सदस्य अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और तत्कालीन चेयरमैन एल. खियांग्ते की कथित भूमिका को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
लाखों में तय हुआ था रेट
आरोपी के बयान के मुताबिक, 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (PT) में पास कराने का रेट सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए ₹5 लाख और एससी/एसटी अभ्यर्थियों के लिए ₹2 से ₹3 लाख तय किया गया था। वहीं, अंतिम चयन (Final Selection) तक का रेट प्रति अभ्यर्थी 60 लाख से 70 लाख बताया गया है।
कोडिंग-डीकोडिंग का खेल और बोर्ड आवंटन
जांच में सामने आया है कि आरोपी आदित्य पांडेय के जरिए अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह की मदद से अभ्यर्थियों की सिफारिश आयोग के सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी।
- आरोप: आयोग के सदस्य और चेयरमैन इंटरव्यू से ठीक एक दिन पहले टीडीपीएल प्रमुख रामवीर सिंह पर दबाव बनाकर अभ्यर्थियों के रोल कोड को डी-कोड करवा लेते थे।
- मकसद: डी-कोडिंग का मुख्य उद्देश्य पसंदीदा अभ्यर्थियों को अपने या मनचाहे सदस्य के इंटरव्यू बोर्ड में अलॉट (आवंटित) कराना था।
- इस सेटिंग के जरिए कुल 7 अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने और प्रति अभ्यर्थी ₹15 लाख वसूलने का दावा किया गया है।
किसकी क्या थी भूमिका?
- अजीता भट्टाचार्य: आरोप है कि इनके नाम पर इंटरव्यू के पैसे इनके पीए ब्रजराम (निवासी मोरहाबादी) के जरिए लिए जाते थे।
- तत्कालीन चेयरमैन एल. खियांग्ते: बयान के अनुसार, पूर्व चेयरमैन 'धर्मेंद्र' नाम के एक व्यक्ति के जरिए पैसों का लेन-देन करते थे।
- जमाल अहमद: इन पर हजारीबाग के स्थानीय दलालों के जरिए अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने और इसकी पूरी जानकारी टीडीपीएल निदेशक को देने का आरोप है।
सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा में भी धांधली के दावे
अभय तिवारी ने खुलासा किया कि केवल सिविल सेवा ही नहीं, बल्कि सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा में भी टीडीपीएल की ओर से अभ्यर्थियों को सेटिंग का विकल्प दिया गया था, जिसका रेट ₹10 लाख प्रति अभ्यर्थी रखा गया था।
बयान में उदाहरण देते हुए कहा गया कि 'रजक' नाम के एक अभ्यर्थी का इंटरव्यू बोर्ड पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते के पास था, जिसके लिए कथित तौर पर ₹15 लाख दिए गए। वहीं 'काजल भारती' नामक अभ्यर्थी का इंटरव्यू अजीता भट्टाचार्य के बोर्ड में कराने के एवज में उनके पीए ब्रजराम को 10 लाख दिए जाने का दावा किया गया है।
फिलहाल, सीआईडी इन बयानों और रामवीर सिंह के कबूलनामे के आधार पर वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की गहनता से जांच कर रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट