Bihar School Violence: डरा-धमकाकर बच्चों को पीटते दिखे कर्मचारी, स्कूल कर्मियों पर FIR दर्ज, वायरल वीडियो से हड़कंप

Bihar School Violence: स्कूल कर्मियों द्वारा मूक-बधिर बच्चों की बेरहमी से पिटाई और प्रताड़ना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।...

Muzaffarpur Deaf School Abuse Video Sparks Massive Outrage
डरा-धमकाकर बच्चों को पीटते दिखे कर्मचारी- फोटो : reporter

Bihar School Violence:स्कूल कर्मियों द्वारा मूक-बधिर बच्चों की बेरहमी से पिटाई और प्रताड़ना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मुजफ्फरपुर जिले के मिठनपुरा थाना क्षेत्र स्थित चर्च रोड के बागेश्वरी मूक वधिर स्कूल से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। स्कूल कर्मियों द्वारा मूक-बधिर बच्चों की बेरहमी से पिटाई और प्रताड़ना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल के कर्मचारी मासूम और बेजुबान बच्चों को डराते-धमकाते हुए मारपीट कर रहे हैं।

यह मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह स्कूल एक निजी एनजीओ द्वारा संचालित किया जाता है, जहां करीब 50 बच्चे रहते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद अब लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्कूल प्रबंधन को पहले से इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल जांच कराई। अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) तुषार कुमार ने बताया कि जांच में स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक को दोषी पाया गया है। इसके बाद मिठनपुरा थाना में स्कूल के संस्थापक संजय कुमार और शिक्षक राजू कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

इधर, इस मामले ने हाल ही में मुशहरी थाना क्षेत्र के नरौली स्थित बृहद आश्रय गृह से 10 बच्चों के भागने की घटना को भी फिर चर्चा में ला दिया है। लोगों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं बच्चों के भागने के पीछे भी इसी तरह की प्रताड़ना या भय का माहौल तो नहीं था। हालांकि पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

प्रशासन ने साफ किया है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। वायरल वीडियो के बाद बाल संरक्षण व्यवस्था और आश्रय गृहों की निगरानी को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा