Viral Video : बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुँचनेवाले शख्स को कर्मियों ने लौटाए रूपये, सीएम ने दिए मामले के जांच के आदेश
Viral Video : सड़क पर कंकाल लेकर चलते हुए जीतू मुंडा का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। सरकारी हस्तक्षेप के बाद मंगलवार को बैंक ने उसकी बहन की जमा राशि उसे सौंप दी.....पढ़िए आगे
N4N DESK : ओडिशा के क्योंझर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक बेबस भाई को अपनी मृत बहन के हक के पैसे पाने के लिए उसका शव कब्र से खोदकर बैंक ले जाना पड़ा। जीतू मुंडा नामक व्यक्ति अपनी बहन कालरा के बैंक खाते में जमा मात्र 20 हजार रुपये निकालने के लिए हफ्तों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र स्वीकार करने के बजाय नियम और प्रक्रिया का हवाला देते हुए बार-बार मृतिका को बैंक लाने की शर्त रखी, जिससे तंग आकर जीतू ने यह खौफनाक कदम उठाया।
घटना का खुलासा तब हुआ जब जीतू मुंडा अपनी बहन का कंकाल सड़क पर लेकर बैंक की ओर बढ़ता दिखा और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जीतू की बहन कालरा का निधन इसी साल 26 जनवरी को हुआ था। जीतू का कहना है कि वह कई बार बैंक गया और अपनी बहन की मौत की सूचना दी, लेकिन बैंक कर्मियों ने हर बार उसे यही कहा कि जब तक खाताधारक स्वयं बैंक नहीं आएगी, पैसे नहीं निकाले जा सकते। अनपढ़ होने के कारण जीतू ने बैंक की इस 'तकनीकी' बात को सच मान लिया और अपनी बहन का शव कब्र से बाहर निकाल लिया।
बैंक परिसर में कंकाल को देखते ही वहां मौजूद अधिकारियों और ग्राहकों में भगदड़ मच गई। डरे हुए बैंक अधिकारियों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पटना पुलिस थाने के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला और जीतू को कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में समझाया। पुलिस का कहना है कि जीतू पूरी तरह निरक्षर है और उसे 'नॉमिनी' या 'उत्तराधिकार प्रमाणपत्र' जैसी जटिल प्रक्रियाओं का ज्ञान नहीं था। वहीं, बैंक अधिकारी भी उसे सरल भाषा में पैसे निकालने का सही तरीका समझाने में नाकाम रहे, जिसकी परिणति इस दुखद वाकये में हुई।
मामला चर्चा में आने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंगलवार शाम उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उत्तरी संभाग के राजस्व आयुक्त को इस मामले की गहन जांच करने और भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब जीतू को उसकी बहन का मृत्यु प्रमाणपत्र और उत्तराधिकार प्रमाणपत्र उपलब्ध करा दिया है, ताकि उसे आगे कोई समस्या न हो।
राज्य सरकार ने पीड़ित आदिवासी व्यक्ति को जिला रेड क्रॉस कोष से 30 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता भी प्रदान की है। मंगलवार को आखिरकार बैंक ने वह जमा राशि भी जीतू को सौंप दी, जिसके लिए उसे इतना अपमानजनक संघर्ष करना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में बहन के शव को वापस कब्रिस्तान ले जाकर पूरे सम्मान के साथ दोबारा दफनाया गया है। यह घटना न केवल बैंकिंग प्रणाली की जटिलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि नियमों की आड़ में मानवीय संवेदनाएं कैसे दम तोड़ देती हैं।