बिहार की नई टाउनशिप योजना से शाहाबाद का पत्ता साफ: जिलेवासियों में मायूसी, शुरु हुई राजनीति

Bihar News : बिहार सरकार द्वारा प्रदेश के 11 प्रमुख शहरों में नई 'ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप' विकसित करने जा रही है। इस योजना में रोहतास जिले काे एक भी शहर को शामिल नहीं किया गया है। अब इस मामले पर राजनीति शुरु हो गई है....

बिहार की नई टाउनशिप योजना से शाहाबाद का पत्ता साफ: जिलेवासिय
सैटेलाइट टाउनशिप पर राजनीति- फोटो : रंजन कुमार

Sasaram : बिहार सरकार द्वारा प्रदेश के 11 प्रमुख शहरों में नई 'ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप' विकसित करने की घोषणा के बाद शाहाबाद क्षेत्र में नाराजगी के स्वर उभरने लगे हैं। इस महत्वाकांक्षी सूची में शाहाबाद क्षेत्र के एक भी जिले के किसी शहर को शामिल नहीं किया गया है। भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से बेहद समृद्ध रोहतास जिले की अनदेखी को लेकर स्थानीय लोगों में मायूसी है, वहीं अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।


विपक्ष ने लगाया राजनीतिक भेदभाव का आरोप 

टाउनशिप के चयन में रोहतास की अनदेखी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर हमला बोला है। राजद के जिलाध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर ने कहा कि एनडीए सरकार शुरू से ही शाहाबाद क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की जनता ने वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन को भारी समर्थन दिया था, लेकिन बदले में उन्हें केवल उपेक्षा मिली है। विपक्ष इसे सीधे तौर पर 'राजनीतिक भेदभाव' का उदाहरण बता रहा है।


सत्ताधारी विधायक का दावा: 'टाउनशिप से बड़ा है मास्टर प्लान' 

विपक्ष के आरोपों के बीच सासाराम की आरएलएम विधायक स्नेहलता कुशवाहा ने सरकार का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सासाराम के लिए उनके पास टाउनशिप से भी बड़ी और व्यापक विकास योजनाएं हैं। विधायक के अनुसार, सासाराम के लिए एक विशेष 'मास्टर प्लान' पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत शहर का कायाकल्प सैटेलाइट टाउनशिप से कहीं अधिक तेजी और आधुनिकता के साथ किया जाएगा। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि विकास की दौड़ में सासाराम पीछे नहीं रहेगा।


रोहतास की भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्ता की अनदेखी 

स्थानीय विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि रोहतास जिला पर्यटन और औद्योगिक संभावनाओं का केंद्र है। कैमूर की पहाड़ियाँ, ऐतिहासिक किले और जलप्रपातों के कारण यहाँ ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए पर्याप्त आधार मौजूद थे। ऐसे में सरकार द्वारा इसे सूची से बाहर रखना समझ से परे है। लोगों का कहना है कि टाउनशिप से न केवल रोजगार बढ़ता, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचा भी मजबूत होता, जिससे यह इलाका एक नया आर्थिक केंद्र बन सकता था।


वादों और दावों की कसौटी पर भविष्य 

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विपक्ष का उपेक्षा वाला आरोप सही है या सत्ताधारी विधायक का मास्टर प्लान वाला दावा हकीकत बनेगा? सासाराम की जनता अब यह देख रही है कि टाउनशिप की इस चूक की भरपाई सरकार किस प्रकार करती है। फिलहाल, टाउनशिप की सूची में जगह न मिलना इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा सासाराम की सड़कों से लेकर सदन तक गूंज सकता है।


रंजन की रिपोर्ट