Bihar Crime:चोरी के शक में युवक को बनाया बंधक, भीड़तंत्र के बढ़ते ग्राफ से खाकी और कानून पर उठ रहे सवाल

Bihar Crime:चोरी के मामूली संदेह पर ग्रामीणों द्वारा एक युवक को बेरहमी से बंधक बनाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है।

Supaul Drama Youth Held on Theft Suspicion Video Sparks Row
युवक को बनाया बंधक- फोटो : reporter

Bihar Crime: सुपौल जिले से एक बार फिर भीड़तंत्र और कानून को अपने हाथ में लेने की खतरनाक बानगी सामने आई है। जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के सिमराही राउत एवं पासवान टोला वार्ड नंबर 16 में चोरी के मामूली संदेह पर ग्रामीणों द्वारा एक युवक को बेरहमी से बंधक बनाए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है।

बकरियां और साइकिल चोरी का आरोप, वायरल हुआ वीडियो

मिली जानकारी के अनुसार, बंधक बनाए गए युवक की पहचान त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के पतरघटी निवासी मोहम्मद जावैद के 18 वर्षीय पुत्र मोहम्मद सुलतान के रूप में हुई है। स्थानीय निवासी राहुल कुमार का दावा था कि उनकी दो बकरियां घर के पास से गायब हो गई थीं, वहीं दूसरे स्थानीय निवासी विजय कुमार की साइकिल भी घर के दरवाजे से चोरी हो गई थी।मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद ग्रामीणों ने एक संदिग्ध युवक की पहचान मोहम्मद सुलतान के रूप में होने का दावा किया। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उसे पकड़कर बंधक बना लिया और हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते इस हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

मां का छलका दर्द और पुलिस की तफ्तीश

हंगामे की सूचना मिलते ही डायल 112 की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और युवक को ग्रामीणों के चंगुल से मुक्त कराकर अपने कब्जे में लिया। इस बीच, युवक की मां अफसाना खातून भी मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने अपने बेटे पर लगे सभी चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह अपने बेटे सुलतान को सुपौल के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराने के लिए घर से निकली थीं और अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण रास्ते में चंदा मांग रही थीं।राघोपुर थानाध्यक्ष अमित कुमार राय ने बताया कि पुलिस वायरल वीडियो और पूरे मामले की सघनता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो में दिख रहे अन्य लोग कौन थे और क्या वाकई युवक इस घटना में शामिल था या उसे बेवजह प्रताड़ित किया गया। जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भीड़तंत्र का बढ़ता ग्राफ और चेतावनी

न्याय और कानून को ताक पर रखकर खुद फैसला सुनाने की यह प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।यदि किसी पर कोई शक है, तो उसकी जांच कानून और पुलिस का काम है लेकिन भीड़ द्वारा खुद कानून हाथ में लेना सभ्य समाज के माथे पर एक बड़ा कलंक है।प्रशासन को ऐसे मामलों में तुरंत और सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि कानून का राज कायम रहे और इस तरह के अवैध बंधक बनाने के मामलों पर रोक लग सके।