बिहार में नहीं रुक रहा भ्रूण जांच का खेल,वायरल वीडियो ने खड़े किए गंभीर सवाल

Bihar Crime: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी और प्रसव पूर्व भ्रूण के लिंग की जांच पर रोक को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।...

Motihari Ultrasound Video Raises Questions Over Illegal Sex
भ्रूण जांच का खेल- फोटो : reporter

Bihar Crime: पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी और प्रसव पूर्व भ्रूण के लिंग की जांच पर रोक को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केसरिया क्षेत्र के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर गर्भ में पल रहे बच्चे के लड़का या लड़की होने की जानकारी देने के एवज में तीन हजार रुपये की मांग किए जाने की बातचीत सुनाई दे रही है।वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह केसरिया स्थित मां वैष्णो अल्ट्रासाउंड सेंटर का है। हालांकि, न्यूज4नेशन वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में एक गर्भवती महिला के परिजन अल्ट्रासाउंड कराने के लिए केंद्र पर पहुंचे हैं। बातचीत के दौरान परिजन कथित तौर पर गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग बताने के लिए दो हजार रुपये की बात करते हैं। इसके जवाब में केंद्र में मौजूद कर्मी कथित तौर पर तीन हजार रुपये लेने की बात करता है और जांच के बाद लड़का या लड़की बताए जाने का दावा करता दिखाई देता है। वीडियो में केंद्र संचालक के भी नजर आने का दावा किया जा रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रतिबंध के बावजूद प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण जैसी गतिविधि कैसे संचालित हो रही थी?देश में प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर कानूनी रोक है। इसका मकसद भ्रूण के लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई पर लगाम लगाना है। ऐसे में वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सोशल मीडिया पर मोतिहारी जिले के केसरिया, अरेराज और जिला मुख्यालय के कुछ अल्ट्रासाउंड केंद्रों में कथित तौर पर भ्रूण के लिंग की जांच किए जाने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।इससे पहले अरेराज में अस्पताल के आसपास कथित तौर पर भ्रूण के शव मिलने की घटना ने भी सनसनी पैदा की थी। इन घटनाओं के बाद अब केसरिया के कथित वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसमें लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सिर्फ संबंधित सेंटर ही नहीं, बल्कि इस तरह के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जरूरत होगी।फिलहाल वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के सामने एक तल्ख सवाल खड़ा कर दिया है—अगर प्रतिबंधित भ्रूण जांच का खेल सचमुच चल रहा है, तो निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार