Bihar Crime: बीच सड़क पर लड़की के साथ हैवानियत, शैतान युवक ने युवती पर की लात-घूंसों की बरसात

Bihar Crime: बिहार की धरती पर एक बार फिर इंसानियत शर्मसार हुई है।...

Lakhisarai Public Beating of Girl Exposes Patriarchal Mindse
बीच सड़क पर लड़की के साथ हैवानियत- फोटो : reporter

Bihar Crime: बिहार की धरती पर एक बार फिर इंसानियत शर्मसार हुई है। मामला लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम रोड का है, जहाँ सरेआम एक सिरफिरे युवक ने युवती पर लात-घूंसों की बरसात कर दी। यह कोई मामूली झड़प नहीं थी, बल्कि पितृसत्ता की उस जहरीली मानसिकता का खुला प्रदर्शन था, जो यह बर्दाश्त नहीं कर पाती कि कोई महिला या लड़की अपनी मर्जी से जीवन जिए या फोन पर किसी से बात करे।

क्या थी पूरी घटना?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, युवती अशोक धाम के पास फोन पर किसी से बातचीत करते हुए गुजर रही थी। यह बात उस युवक को नागवार गुजरी जिसके साथ उसकी शादी तय हुई थी। शक और सनक में अंधे हो चुके उस युवक ने न आव देखा न ताव, बीच सड़क पर युवती को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब तमाशबीन बने रहने के बजाय कुछ लोग इसका वीडियो बनाने लगे। जब एक व्यक्ति ने इसका विरोध किया और पीछा कर उस उपद्रवी को पकड़ने की कोशिश की, तो यह समाज की उस सड़न को उजागर कर गया जो हमारी आँखों के सामने पल रही है।

क्यों बढ़ रही है ऐसी हैवानियत?

जमुई और समस्तीपुर जैसी हालिया घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा अब इक्का-दुक्का मामले नहीं, बल्कि एक सामाजिक बीमारी बन चुकी है। पुरुषों का यह भ्रम कि महिलाएँ उनकी जागीर हैं और उन पर नियंत्रण रखना उनका अधिकार है। प्रशासनिक सख्ती और पुलिस का डर कमजोर पड़ने से शोहदों और उपद्रवी तत्वों के हौसले बुलंद हैं।यहीं नही संस्कारों का पतन हो रहा है। युवाओं में बढ़ती आक्रामकता, असहिष्णुता और नैतिक मूल्यों का लगातार क्षरण हो रहा है ,यह कारण भी महिला हिंसा के लिए जिम्मेवार माना जा रहा है।

अब चुप रहना गुनाह है!

यह सच है कि हर मोड़ पर पुलिस खड़ी नहीं हो सकती। यदि समाज में बदलाव लाना है, तो आम आदमी को ही अपनी चुप्पी तोड़नी होगी। जब तक हम ऐसी हरकतों पर तमाशा देखते रहेंगे, तब तक हमारी बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं हो सकतीं। यह समय सिर्फ मूकदर्शक बनने का नहीं, बल्कि इस गंदी पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने का है। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कहाँ जा रहा है हमारा समाज? यदि आज हमने इसका विरोध नहीं किया, तो कल यह दरिंदगी हमारे अपने घरों के दरवाजे तक पहुँच जाएगी।इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।