आरा पुलिस ने किया था सुनियोजित कत्ल-ए-आम! पांच अलग-अलग पिस्तौल से मारी गई थी गोली, भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील का सनसनीखेज खुलासा, 1400 करोड़ के घोटाले से जुड़े हैं कत्ल के तार, खुल गया राज
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के एक सनसनीखेज खुलासे ने खाकी और कानून के गलियारों में कोहराम मचा दिया है।
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के एक सनसनीखेज खुलासे ने खाकी और कानून के गलियारों में कोहराम मचा दिया है। वकील संजीव कुमार सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस सनसनीखेज वारदात को महज़ एक 'मुठभेड़' नहीं, बल्कि पुलिस महकमे द्वारा रची गई एक सुनियोजित साजिश और कत्ल-ए-आम करार दिया है। उनके इन बेबाक और संगीन इल्जामों ने कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

साजिश की बिसात और फर्जी तस्करा
अटॉर्नी (वकील) संजीव कुमार सिंह के मुताबिक, 17 जून 2026 को जिस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया, उसकी काली साजिश दो रोज पहले यानी 15 जून को ही बुन ली गई थी। इसके तहत 16 जून को शाहपुर के डीएसपी राजेश कुमार शर्मा ने पुलिस हेडक्वार्टर को एक फर्जी और मनगढ़ंत रिपोर्ट भेजी। इस रिपोर्ट में इलाके में भारी फसाद, दंगा और बड़े कांड की झूठी इत्तिला दी गई, ताकि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम को मैदान में उतारा जा सके। हकीकत यह थी कि वहां ऐसा कोई वाकया होने वाला ही नहीं था। यह सब खाकी के साये में एक निर्दोष की जान लेने का खौफनाक षड्यंत्र था।

फेसबुक लाइव, सरेंडर और दरिंदगी की इंतेहा
घटनाक्रम का जिक्र करते हुए वरिष्ठ वकील ने बताया कि एसटीएफ के दरिंदे 16 जून को ही बिलौटी गांव आ धमके थे। अगले दिन, यानी 17 जून को भरत तिवारी ने खुद फेसबुक पर लाइव आकर मुकम्मल तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद, जाब्ते के कानूनों को ताक पर रखकर उसे घेर लिया गया और बेहद बेरहमी से गोलियों से छलनी कर दिया गया।
शुरुआत में उसे फासले से तीन गोलियां मारी गईं। जब इन जख्मों के बाद भी उसकी सांसें चलती रहीं, तो साक्ष्यों (सबूतों) को मिटाने और जुबान हमेशा के लिए बंद करने की नीयत से उसे एक गाड़ी में ठूंस दिया गया। गाड़ी के भीतर ले जाने के बाद बेहद नजदीक से दो और गोलियां दागी गईं। पहली तीन और आखिरी दो गोलियों के दरमियान महज़ 15 मिनट का फासला था। गाड़ी के अंदर मारी गई गोलियों में से एक गोली भरत के अंदरूनी हिस्से की नस को चीरती हुई निकल गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पांच अलग-अलग पिस्तौल और बैलिस्टिक रिपोर्ट का पर्दाफाश
अस्त्र-शस्त्र परीक्षण की रिपोर्ट ने इस फर्जी मुठभेड़ की कलई खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को पांच अलग-अलग पिस्तौल से गोलियां मारी गईं। इसका साफ मतलब है कि इस खूनी खेल में कई खाकीधारी शामिल थे। तीन गोलियां थोड़ी दूर से और दो गोलियां पॉइंट ब्लैंक रेंज उतारी गईं।
1400 करोड़ का घोटाला और कत्ल का असली मोटिव
सुप्रीम कोर्ट के वकील ने इस कत्ल के पीछे छिपे सबसे बड़े स्याह राज से पर्दा उठाते हुए कहा कि इस वारदात का असल मकसद 1400 करोड़ रुपये का महाघोटाला है। यह वह रकम थी जो जवइनिया गांव के विस्थापितों (उजाड़े गए लोगों) के हक की थी। इस बड़े वित्तीय घोटाले को छिपाने के लिए ही भरत तिवारी को रास्ते से हटाया गया।वकील ने दावा किया कि उनके पास पुख्ता सुबूतों का अम्बार है—जिसमें बैलिस्टिक रिपोर्ट, फेसबुक लाइव का वीडियो फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसकर्मियों के बीच हुई कॉल्स की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) रिपोर्ट शामिल है, जो पटना पुलिस हेडक्वार्टर में दर्ज है।
गैर-जमानती वारंट और शिकंजे की तैयारी
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा इस मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश मिल चुके हैं। वकील ने खुलासा किया कि इस खूनी खेल में जगदीशपुर डीएसपी, शाहपुर थाने के एसएचओ और एसटीएफ के जवान तो मिले ही हैं, साथ ही मुख्य साजिशकर्ता जगदीशपुर के एसडीएम भी हैं। दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए आरा कोर्ट में नॉन-बेलेबल वारंट की अर्जी दी गई है। वकीलों के कड़े तेवर से यह साफ है कि आने वाले दिनों में आरोपी पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अफसरों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं, और कानून का शिकंजा उन पर कसता चला जाएगा।