BPSC 72nd Exam:बिहार में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, 1200 से अधिक पदों पर भर्ती, 120 SDM-डीएसपी के पद शामिल, अब इस पेपर पैटर्न पर होगी परीक्षा

बिहार लोक सेवा आयोग ने 72वीं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारियां तेज कर दी हैं, और इस बार भर्ती प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक व्यापक और सख्त होने वाली है।

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बिहार में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका- फोटो : social Media

BPSC 72nd Exam: बिहार की प्रशासनिक सेवा में एक बार फिर बड़ा अवसर खुलने जा रहा है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 72वीं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारियां तेज कर दी हैं, और इस बार भर्ती प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक व्यापक और सख्त होने वाली है। आयोग के अनुसार, इस बार 1200 से अधिक पदों पर बहाली की संभावना है, जिनमें करीब 120 पद एसडीएम और डीएसपी स्तर के होंगे।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक विभिन्न विभागों से 1100 से अधिक पदों की अधियाचना मिल चुकी है, जिससे यह स्पष्ट है कि इस बार अवसरों की संख्या अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा मौका साबित हो सकती है।

सबसे बड़ा बदलाव इस बार परीक्षा के पैटर्न में देखने को मिलेगा। BPSC अब परीक्षा प्रणाली को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर और अधिक सख्त व विश्लेषणात्मक बनाने जा रहा है। आयोग का मानना है कि कई अभ्यर्थियों में भाषा की शुद्धता और प्रशासनिक लेखन क्षमता कमजोर पाई जाती है, इसलिए अब ऑब्जेक्टिव पेपर में ही हिंदी व्याकरण, शब्द विन्यास, मात्रा और वाक्य संरचना से जुड़े गहरे सवाल पूछे जाएंगे।यह कदम इस उद्देश्य से लिया जा रहा है कि चयनित अधिकारी प्रशासनिक स्तर पर अधिक प्रभावी और भाषा में सटीक हों।

परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाने के लिए BPSC पहली बार ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी में है, जिससे पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। आयोग 20 से 25 अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा नकल रोकने के लिए परीक्षा में 4 से 8 अलग-अलग रंगों के प्रश्नपत्र भी उपयोग किए जा सकते हैं।

वर्तमान में आयोग 70वीं और 71वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है। 70वीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जुलाई 2026 तक आने की संभावना है, जबकि 71वीं मुख्य परीक्षा 25 से 30 अप्रैल के बीच आयोजित की जाएगी। 72वीं BPSC परीक्षा न सिर्फ पदों की संख्या के लिहाज से बड़ी होगी, बल्कि कठिनाई, पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया के नए मानकों के कारण यह अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है।