कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, भारत में पेट्रोल डीजल होगा सस्ता, 90 डॉलर के नीचे फिसला, वैश्विक तनाव पर बाजार की पैनी नजर

Oil Prices: सप्ताह की शुरुआत वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। ...

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भारत में पेट्रोल डीजल होगा सस्ता- फोटो : social Media

Oil Prices: सप्ताह की शुरुआत वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। कारोबार के शुरुआती दौर में इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7 प्रतिशत से अधिक टूटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और इसकी कीमत करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर होती दिखाई दी। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट और यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान पर कई दिनों तक सैन्य कार्रवाई के बाद हमलों को रोकने की खबर से बाजार में तनाव कुछ कम हुआ है। इसके बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली और तेल बाजार में बिकवाली बढ़ गई। दूसरी ओर, ईरानी सेना ने भी कहा है कि उसने अपनी जवाबी सैन्य कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तत्काल तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।

हालांकि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर के तट पर स्थित सऊदी अरब के जीजान और यानबू क्षेत्रों में सऊदी अरामको से जुड़ी तेल सुविधाओं को निशाना बनाया। हालांकि सऊदी अरब और अरामको की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।बीते कुछ महीनों में अमेरिका-ईरान तनाव और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसी वजह से इस महीने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 25 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अहम समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे ने दुनिया भर में तेल आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, सप्ताहांत में सऊदी अरब ने दो प्रांतों के लिए एहतियातन इमरजेंसी अलर्ट जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। यानबू बंदरगाह, जो सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का पश्चिमी छोर है, होर्मुज मार्ग प्रभावित होने की स्थिति में देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं जीजान में अरामको की बड़ी रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। वहीं यदि संघर्ष दोबारा तेज होता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में वैश्विक बाजार की नजर अब क्षेत्रीय घटनाक्रम और प्रमुख देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।