शोक में डूबा सुपौल: राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात शिक्षाविद कालीचरण मिश्रा का निधन, शिक्षा जगत में शोक की लहर
Supaul : जिले के सुप्रसिद्ध शिक्षाविद और विलियम्स हाई स्कूल, सुपौल के पूर्व प्रधानाचार्य कालीचरण मिश्रा का लगभग 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पूर्व में राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। शिक्षा जगत उनके अवसान को एक अपूरणीय क्षति मान रहा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
कालीचरण मिश्रा ने अपने लंबे कार्यकाल के दौरान सुपौल में शिक्षा की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिससे इस क्षेत्र का नाम न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में रोशन हुआ। उनके कुशल मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र आज देश-विदेश के कोने-कोने में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सिविल सेवा और राजनीति जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने हजारों युवाओं के जीवन को नई दिशा देते हुए उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभाई।
उनके निधन पर राजनीति और सामाजिक क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र नारायण ठाकुर, और कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं, कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी ने बिहार सरकार से पुरजोर मांग की है कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके महान योगदान को देखते हुए कालीचरण मिश्रा जी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए।
श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ. विजय शंकर चौधरी, बीजेपी जिलाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ऋषिदेव, सुरेंद्र नारायण पाठक, संतोष प्रधान और ग्रीश चन्द्र ठाकुर जैसे कई गणमान्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि मिश्रा जी जैसे शिक्षाविद विरले ही होते हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज को शिक्षित और संस्कारित करने में समर्पित कर दिया। उनके निधन से एक ऐसे युग का अंत हो गया है जिसने सुपौल की शैक्षणिक गरिमा को वैश्विक पहचान दिलाई थी।
कालीचरण मिश्रा जी के पार्थिव शरीर पर अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय लोगों, शिक्षकों और उनके पूर्व छात्रों का तांता लगा रहा। उनके शिष्यों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वे न केवल एक शिक्षक थे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत बने रहेंगे। उनका अनुशासित जीवन और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी अंतिम विदाई के समय पूरे शहर की आंखें नम थीं, जो उनके प्रति जन-जन के सम्मान को दर्शाती है।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट