एसएसबी ने मानव तस्करी के प्रयास को किया विफल, नेपाल से भारत लाई जा रही नाबालिग को कराया मुक्त

भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनात 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), बीरपुर के जवानों ने भीमनगर चेक पोस्ट पर मुस्तैदी दिखाते हुए मानव तस्करी के एक बड़े प्रयास को विफल कर दिया है...

एसएसबी ने मानव तस्करी के प्रयास को किया विफल, नेपाल से भारत
नेपाल से भारत लाई जा रही नाबालिग को कराया एसएसबी ने कराया मुक्त- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : भारत-नेपाल सीमा पर तैनात 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), बीरपुर के जवानों ने मानव तस्करी के एक बड़े प्रयास को सफलतापूर्वक विफल कर दिया है। वाहिनी के द्वितीय कमान अधिकारी सह कार्यवाहक कमांडेंट जगदीश कुमार शर्मा ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सीमा चौकी भीमनगर के सतर्क जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए नेपाल से भारत की तरफ आ रही दो संदिग्ध लड़कियों को रोककर देश में प्रवेश करने से पहले ही इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।


विरोधाभासी बयानों से गहराया शक, जांच में खुली पोल

भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय चेक पोस्ट भीमनगर पर तैनात जवान जब नियमित जांच और निगरानी ड्यूटी पर थे, तभी नेपाल की ओर से दो लड़कियां भारत की सीमा में दाखिल हो रही थीं। संदेह के आधार पर जवानों ने उन्हें रोका और उनके पहचान पत्रों की जांच शुरू की। पूछताछ के दौरान दोनों लड़कियां लगातार अपने बयान बदल रही थीं और अलग-अलग व विरोधाभासी जानकारियां दे रही थीं। बार-बार बयान बदलने के कारण जवानों का संदेह और गहरा गया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू की गई।


नौकरी का झांसा देकर 14 वर्षीय नाबालिग को लाया जा रहा था भारत

एसएसबी द्वारा की गई गहन जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि यह मामला सीधे तौर पर मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) से जुड़ा हुआ है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बरामद की गई लड़कियों में एक महज 14 वर्ष की नाबालिग बच्ची है। उसे नेपाल में बेहतर नौकरी और सुनहरे भविष्य का प्रलोभन देकर अवैध तरीके से सीमा पार कराकर भारत लाया जा रहा था। गिरोह का मकसद नाबालिग को भारतीय शहरों में ले जाकर उसका शोषण करना था।


स्वयंसेवी संस्थाओं की मौजूदगी में कानूनी कार्रवाई, पुलिस को सौंपा

मामले की गंभीरता को देखते हुए 45वीं वाहिनी की मानव तस्करी विरोधी दल (AHTU) को तुरंत सूचित किया गया। इसके बाद मौके पर 'सर्वो प्रयास संस्था' (मधुबनी) और 'जागरण कल्याण भारती' (फारबिसगंज) के प्रतिनिधियों को बुलाया गया। इन सामाजिक संस्थाओं और एसएसबी के अधिकारियों की मौजूदगी में आवश्यक कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। इसके पश्चात, आगे की कानूनी कार्रवाई और मामले की तह तक जाने के लिए संबंधित महिला और मुक्त कराई गई नाबालिग लड़की को भीमनगर थाना (जिला सुपौल) की पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।


सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिबद्धता और सराहनीय भूमिका

इस सफल ऑपरेशन में सशस्त्र सीमा बल के सहायक उप निरीक्षक मोहनलाल सहित अन्य सुरक्षा कार्मिकों ने अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई। कार्यवाहक कमांडेंट जगदीश कुमार शर्मा ने कहा कि 45वीं वाहिनी एसएसबी सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों, सीमा अपराधों और विशेषकर मानव तस्करी जैसी अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट