सुपौल में बाढ़-सुखाड़ से निपटने की तैयारी तेज: डीएम ने संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के दिए कड़े निर्देश

सुपौल में बाढ़-सुखाड़ से निपटने की तैयारी तेज: डीएम ने संवेद
सुपौल में बाढ़-सुखाड़ से निपटने की तैयारी तेज- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : मानसून के दस्तक देने के साथ ही सुपौल जिले में संभावित बाढ़ और सुखाड़ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। शुक्रवार को समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में जिलाधिकारी (DM) सावन कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय और विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चल रही तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई और अधिकारियों को पूरी सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ ग्राउंड पर डटे रहने का निर्देश दिया गया।


कटाव निरोधी कार्य पूरे, तटबंधों पर उपस्थिति पंजी संधारित करने का आदेश

बैठक के दौरान जिले के सभी छह जल संसाधन प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं (Executive Engineers) ने अपने-अपने क्षेत्रों में कराए गए बाढ़ पूर्व कटाव निरोधी कार्यों की रिपोर्ट पेश की। समीक्षा में सामने आया कि सभी आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य समय सीमा के भीतर पूरे कर लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा कर देना काफी नहीं है। उन्होंने कड़ा निर्देश दिया कि सभी अभियंता अपने-अपने क्षेत्र के संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील तटबंधों का नियमित निरीक्षण करें और प्रत्येक निरीक्षण स्थल पर एक 'उपस्थिति पंजी' (Attendance Register) संधारित करें, ताकि अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी पारदर्शी और प्रभावी बनी रहे।


पश्चिमी तटबंध की होगी सघन निगरानी, एसडीएम और सीओ को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश

बैठक में कोसी नदी के पश्चिमी तटबंध की सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई। डीएम ने अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) को निर्देश दिया कि पश्चिमी तटबंध पर लगातार और सघन निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही, सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDM) और अंचलाधिकारियों (CO) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित और नदी किनारे के गांवों का लगातार दौरा करें। यदि कहीं भी कटाव या जलस्तर में अचानक वृद्धि जैसी प्रतिकूल स्थिति दिखती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष (District Control Room) को दी जाए ताकि समय रहते राहत कार्य शुरू हो सके।


सुखाड़ की चुनौती से निपटने के लिए भी बैकअप प्लान तैयार

बैठक में केवल बाढ़ ही नहीं, बल्कि मौसम की अनिश्चितता के कारण पैदा होने वाले संभावित सुखाड़ की स्थिति पर भी मंथन किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन को दोनों परिस्थितियों के लिए समान रूप से तैयार रहना होगा। उन्होंने संबंधित विभागों को जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने, ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और कृषि से जुड़े आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए, ताकि यदि वर्षा कम भी हो, तो किसानों को आर्थिक नुकसान और आम लोगों को पानी की किल्लत से बचाया जा सके।


लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही, बैठक में कई आला अधिकारी रहे मौजूद

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आपदा की स्थिति में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की कोताही से जन-धन की हानि होती है, तो उस पर सीधी कार्रवाई होगी। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त (DDC) सारा अशरफ, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) मो. तारिक, अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी चंद्रभूषण कुमार सहित जल संसाधन विभाग के सभी कार्यपालक अभियंता और संबंधित प्रखंडों के अधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट