जब माता-पिता को ही बच्चों की चिंता नहीं, तो मोदी-नीतीश-लालू क्यों करेंगे? बिहार की बदहाली पर बरसे प्रशांत किशोर
सुपौल में प्रशांत किशोर ने बिहार की बदहाली के लिए जनता और नेताओं को घेरा। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को बताया केंद्र का इशारा। जानें जन सुराज की 5 साल की आगामी रणनीति।
Supaul - : जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार की राजनीति और यहाँ के भविष्य को लेकर तीखा हमला बोला है। सोमवार की रात सुपौल के विद्यापुरी में बुद्धिजीवियों के साथ 'बिहार नवनिर्माण अभियान' पर चर्चा करते हुए पीके ने कहा कि बिहार अब केवल 'मजदूरों की फैक्ट्री' बनकर रह जाएगा। उन्होंने सीधे तौर पर जनता को आईना दिखाते हुए कहा कि जब बिहार के लोगों को ही अपने बच्चों की चिंता नहीं है, तो नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू यादव आपके बच्चों के भविष्य की चिंता क्यों करेंगे?
नीतीश के राज्यसभा जाने पर तंज: "अब केंद्र के इशारे पर चलेगा बिहार"
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए इसे बिहार की स्वायत्तता का समर्पण बताया। उन्होंने कहा कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना यह साबित करता है कि बिहार अब पूरी तरह से केंद्र के इशारे पर चलेगा। पीके ने आरोप लगाया कि पहले बहुमत खरीदा गया और अब बिहार को 'मजदूर एक्सपोर्टर' का दर्जा दिलाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि नया मुख्यमंत्री चाहे कोई भी बने, बिहार का इस्तेमाल अब गुजरात जैसे राज्यों के विकास के लिए कच्चे माल और सस्ते श्रम की आपूर्ति के लिए होगा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर उठाए सवाल
बिहार की आर्थिक स्थिति पर प्रहार करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव खत्म हुए छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि बिहार का खजाना खाली है और वर्तमान में जो नौकरियां हैं, उन्हें भी वेतन मिलना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने हाल के महीनों में देश के अलग-अलग शहरों में बिहार के 50 से ज्यादा मजदूरों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री का इस पर कोई बयान आया, क्योंकि बिहार के वोट की कीमत अब केवल ₹10,000 रह गई है।
जन सुराज की रणनीति: 5 साल तक चलेगा 'बिहार नवनिर्माण अभियान'
विधानसभा चुनावों में मिली हार के सवालों पर पीके ने धैर्य और निरंतरता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि राजनीति में रातों-रात बदलाव नहीं आता, इसके लिए गांधी और नेहरू की तरह लंबे संघर्ष की जरूरत है। उन्होंने घोषणा की कि जन सुराज का अभियान अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलेगा। पीके ने बताया कि नई सरकार को वादे पूरे करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है, जिसके बाद जन सुराज 'बिहार नवनिर्माण अभियान' के तहत घर-घर जाकर संवाद करेगा और एक वैकल्पिक व्यवस्था की नींव रखेगा।
सुपौल के बुद्धिजीवियों के साथ मंथन
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह के आवास पर आयोजित इस चर्चा में शहर के करीब 200 से अधिक बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, सेवानिवृत्त आईएएस ललन कुमार यादव और पूर्व एडीजी जय प्रकाश सिंह जैसे दिग्गज भी शामिल हुए। उपस्थित वकीलों, डॉक्टरों और शिक्षकों ने बिहार के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव साझा किए। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य एक ऐसा संगठन बनाना है जो बिहार में पारदर्शी और विकासोन्मुख राजनीति की नींव रख सके।
रिपोर्ट: विनय कुमार मिश्र लोकेशन: सुपौल